सूरज (sun) की रोशनी में बैठें और पाए विटामिन डी (vitamin d)

सूरज (Sun) की रोशनी में बैठें और पाए विटामिन डी (Vitamin D)

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  • हमारी जीवनशैली में हो रहे बदलावों के कारण हम सूरज की रोशनी से दूर होते जा रहें हैं। सूरज की रोशनी मानव शरीर के लिए बहुत जरूरी विटामिन-डी (Vitamin-D) का एक मुख्य स्रोत है। हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए विटामिन-डी वसा में घुलनशील प्रो-हार्मोन्स का एक समूह होता है। यह एक स्टेरॉयड विटामिन है जो आंतों से कैल्शियम को सोखकर हड्डियों में पहुँचाता है। शरीर में इसका निर्माण हाइड्रॉक्सी कोलेस्ट्रॉल और अल्ट्रावॉयलेट किरणों (Ultraviolet Rays) की मदद से होता है।

    विटामिन डी की कमी और लक्षण – Vitamin D ki kami aur lakshan – Vitamin D deficiency symptoms




    बच्चों में विटामिन डी की कमी के लक्षण – Vitamin D Bachon me

    शिशुओं में समय पर दाँत न आना, पैरों की हड्डियों का कमजोर होना, त्वचा (Skin) का रंग गहरा होना वैसे लक्षण हैं जिससे बच्चों में विटामिन-डी की कमी का पता चलता है। थकान महसूस होना, बच्चों की हड्डियों का टेढ़ा हो जाना, हड्डियों और मांसपेशियों में दर्द रहना, कमर में अक्सर दर्द की शिकायत इसके लक्षणों में शामिल हैं। विटामिन डी की गंभीर कमी से बच्चों में रिकेट्स (हड्डियों का दोषयुक्त विकास) और वयस्कों में ओस्टियोमलेसिया (नर्म हड्डियाँ) तथा ओस्टियोपोरोसिस (हड्डियों का भुरभुरा होना) हो सकते हैं।

    उदास और तनाव महसूस होना

    जिन लोगों के शरीर में विटामिन डी की कमी (Vitamin D deficiency) होती है, वो हमेशा उदास रहने के साथ-साथ तनाव में भी रहते है। इसके अलावा, विटामिन कॉउंसिल का कहना है कि विटामिन डी सेरोटोनिन की मात्रा को प्रभावित करता है, जिसके कारण दिमाग पर इसका अलग ही प्रभाव पड़ता है।

    पसीना आना

    एक्सरसाइज (Exercise) के दौरान पसीना आना बेहद आम बात है लेकिन जब बिना कारण पसीना आ रहा हो तब यह सामान्य नहीं है। जब नेचुरल क्लाइमेट में बैठे हों, तब पसीना निकल रहा हो तो यह विटामिन डी के कमी का संकेत है।

    हड्डियों में दर्द

    यदि हड्डियों में दर्द की समस्या हो तब यह विटामिन डी के लक्षणों में से एक है। ऐसे में विटामिन डी का सेवन करना शुरू कर देना चाहिए। क्योंकि, शरीर में कैल्शियम की अच्छी मात्रा हड्डियों के विकास के लिए सहायक माना जाता है।

    मोटापा

    मोटापा बढऩे के साथ ही शरीर में विटामिन डी (Vitamin D) का स्तर कम होने लगता है। जो लोग मोटापे जैसी बीमारी से ग्रस्त है, उन्हें मोटापे को भी कम करने का प्रयास करना चाहिए।

    इम्युनिटी पावर का कम होना – Immunity Power

    विटामिन डी की कमी के कारण इम्युनिटी सिस्टम कमजोर होने लगता है। जिससे कि बहुत जल्दी बीमार पड़ सकते हैं, और साथ ही इंफेक्शन का भी खतरा बढ़ जाता है। हालाँकि, विटामिन डी के लिए सूर्य की रोशनी एक बेहतर विकल्प है, जिसके जरिये इसकी कमी को पूरा किया जा सकता हैं। क्योंकि, विटामिन डी के जरिये इम्युनिटी सिस्टम और टी कोशिकाओं को बढ़ा सकते हैं।

    थकावट या एनर्जी (Energy) की कमी होना

    विटामिन डी की कमी होने के कारण, शरीर में एनर्जी लेवल कम हो जाता है और सारा दिन थकावट महसूस होने के साथ-साथ, कोई भी काम करने का मन नहीं करता है।




    हाई ब्लड प्रेशर – High Blood-Pressure

    विटामिन डी (Vitamin D) ह्रदय के लिए बहुत जरुरी होता है। शरीर में विटामिन डी की कमी होने के कारण ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। हालाँकि, विटामिन डी के सप्लीमेंट्स लेने से इसको कम भी किया जा सकता है।

    पाचन संबंधी कठिनाइयाँ

    कुछ गैस्ट्रोइनटेस्टाइनल रोग विटामिन डी के अवशोषित करने की क्षमता को प्रभावित करता है। जिससे कि स्ट्रिक बाईपास सर्जरी, सिस्टिक फाइब्रोसिस और क्रोन रोग जैसी बिमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

    मसूड़ों संबंधी बीमारी होना

    विटामिन डी की कमी से मसूड़ों की बीमारियां जैसे मसूड़ों में सूजन, लाल होना और मसूड़ों से खून बहना इत्यादि होने का खतरा बढ़ जाता है।

    विटामिन डी के स्रोत – Sources of Vitamin-D

    सूरज की रौशनी के साथ ही मछली विटामिन डी के सबसे अच्छा स्रोतों में से एक है। मछली में उच्च मात्रा में फैटी एसिड होते हैं। मशरूम में विटामिन डी प्रचुर मात्रा में पायी जाती है। दूध या इससे बनी चीजों को खाने में इस्तेमाल करना चाहिए। दूध में कैल्शियम और विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में होता है। दूध से बनी दही शरीर को पौष्टिकता ही प्रदान नहीं करती अपितु यह कैल्शियम को सोखने में भी मदद करती है। फोर्टीफाइड उत्पाद, सोया उत्पाद और कॉडलीवर तेल का सेवन विटामिन डी सम्बन्धी जरूरतों को पूरा करता है।

    क्यों जरूरी है महिलाओं को विटामिन डी

    महिलाओं में पीरियड्स और गर्भावस्था के दौरान विटामिन डी बहुत ही जरूरी होता है। विटामिन डी शरीर में कैल्शियम के स्तर को कंट्रोल करता है, जो हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करता है, साथ ही उच्च रक्तचाप के खतरे को भी कम करता है।

    विटामिन डी के फायदे – Benefits of Vitamin-D

    • विटामिन डी हमारे हड्डियों को और मजबूत बनाने का काम करता है। इसलिए विटामिन डी से हमारी हड्डिया सालो-साल कमजोर नहीं होती।
    • मांसपेशियां हमेशा काम करे तो विटामिन डी को अपने जीवन में जरूर शामिल करें।
    • बहुत कम लोगों को मालूम है कि विटामिन डी हड्डियों को मजबूत करने के अलावा ह्र्दय रोग और उच्च रक्तचाप से भी छुटकारा दिलाने में मदद करता है।
    • डायबिटीज एक ऐसी गंभीर बीमारी है जिससे तंत्रिका क्षति, हृदय रोग, आंख की क्षति और दृष्टि हानि और गुर्दे खराब हो सकता है। इसलिए विटामिन डी के सेवन से डायबिटीज के संकट को कम किया जा सकता है।



    विटामिन डी बढ़ाने के घरेलू उपाय – Home Remedies for Vitamin-D

    शरीर में विटामिन डी का स्तर बढ़ाने के लिए गर्मी के मौसम में एक दिन में ५ से १० मिनट तक, सूर्य के सामने खड़े रहें। विटामिन डी का भरपूर आहार लें। 40 वर्ष से अधिक आयु की महिलाएं यदि विटामिन डी की कमी से ग्रस्त हैं तो उनमें ओस्टियोपोरोसिस होने की संभावना रहती है। कमी की स्थिति में उन्हें विटामिन डी के पूरक आहार लेने चाहिए। कुछ आहारों में विटामिन डी की थोड़ी मात्रा होती है, जैसे वसायुक्त मछली, जिगर का मांस, अंडे की जर्दी, शक्ति मिश्रित दूध, डेरी उत्पाद और संतरे का रस, शक्ति मिश्रित अनाज और मक्खन और सोया उत्पाद (टोफू और सोया दूध पनीर)।

    योग और व्यायाम – Yoga & Exercise for Vitamin D

    व्यायाम करने से ठड़े मौसम में भी विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में विकसित होता है। वजन सहने वाले (चलना, दौडऩा, नाचना, स्कीइंग करना आदि) और प्रतिरोधक व्यायाम (वजन उठाना, और पानी के तगड़े व्यायाम) व्यायाम के प्रभावी तरीके हैं।

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