जानिए शनी (saturn) ग्रह के बारे में – shani grah in jyotish

जानिए शनी (Saturn) ग्रह के बारे में – Shani Grah in Jyotish

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  • जय शनी देव । भारतीय ज्योतिष में शनी देव को कर्मफलदाता अर्थात पृथ्वी पर उपस्थित प्राणी मात्र के उचित अनुचित कर्मों के फल प्रदान करने वाले न्यायकर्ता के रूप में जाना जाता है । पुष्य , अनुराधा व उत्तराभाद्रपदा शनी देव के नक्षत्र होते हैं । ये मकर व कुम्भ राशि के स्वामी हैं व तीसरी सातवीं और दसवीं दृष्टि से देखते हैं । शनी देव (Shani dev) की स्थिति कुंडली में उचित न होने पर इनको उन्माद, वात, भगंदर व गठिया रोग आदि देने वाला कहा गया है । शनी देवता मेष राशि में नीच और तुला में उच्च के होते हैं । शनी स्वभाव से पापी व क्रूर कहे जाते हैं । शनी देव बुध व शुक्र को मित्र गुरु को सम और सूर्य, चंद्र व मंगल को अपना शत्रु मानते हैं । सामान्यतः शनी देव को दुःख प्रदाता ग्रह मान लिया जाता है जो की अधूरा सत्य है । हमें ये ध्यान रखना चाहिए कि शनी देव को न्यायाधीश की पदवी हासिल है और ये हमारे कर्मों के अनुसार ही शुभाशुभ फल प्रदान करते हैं । यही शनी देव कुंडली में शुभ हों तो मान – सम्मान , पद – प्रतिष्ठा प्राप्त करने में सहायक होते हैं । शनी देव (Shani Dev) को मोक्ष प्रदायक माना जाता है । इनका रत्न नीलम है । कुंडली के सातवें भाव में शनी देवता को दिशा बल मिलता है और इन्हें दंत, हड्डियों, वात व कम्प विकार का कारक कहा जाता है।

    शनी ग्रह (Shani Grah) की कुछ विशेष जानकारी – Saturn Planet Hindi




    दिन : शनिवार

    रंग : काला

    दिशा : पश्चिम

    राशि स्वामी : मकर और कुम्भ

    नक्षत्र स्वामी : पुष्य , अनुराधा व उत्तराभाद्रपदा

    रत्न : नीलम

    धातु : लोहा

    आराध्य देवता : शिव

    मित्र ग्रह : बुध, शुक्र

    सम ग्रह : गुरु

    शत्रु ग्रह : सूर्य, चंद्र, मंगल

    उच्च राशि : तुला

    नीच राशि : मेष

    महादशा समय : 19

    शनी देव का बीज मंत्र : ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्च्राय नमः

    शुभ शनी के लक्षण – Effects of Benefic Saturn – Shubh Shani Ke lakshan

    • जातक रचनात्मक होता है
    • कलात्मक अभिव्यक्ति में माहिर होना
    • बुद्धिमान बनाता है
    • जातक घटनाओं , अनुभवों का उचित विश्लेषण करने की क्षमता रखता है
    • जातक में बेहतरीन निर्णय क्षमता व दूरदर्शिता सहज ही देखने को मिलती है
    • राजनीति में सफल व बेहतर नीतिकार बनाता है
    • अर्थ यानी धन की प्राप्ति कराता है
    • व्यापार में लाभ मिलना
    • लाटरी शेयर बाज़ार से अचानक लाभ मिलना
    • सुखमय वैवाहिक जीवन प्रदान करना
    • धनी पत्नी मिले
    • उत्तम संतान प्राप्त हो
    • लम्बी आयु प्रदान करता है



    अशुभ शनी के लक्षण : Effects of Malefic Saturn – Ashubh Shani Ke lakshan

    • विवाह देरी से होना , समय पर हो तो अलगाव की स्थिति होना
    • मान हानि होना
    • नशे की लत लग जाना
    • व्यभिचारि होना , कई स्त्रियों/ पुरुषों से सम्बन्ध होना
    • आर्थिक संकट आना, ऋण नहीं चुका पाना
    • कोर्ट केस हो जाना
    • ऐक्सिडेंट होना
    • सर में चोट लगना
    • अनिष्ट का भय बना रहना
    • जातक के कार्यों में रुकावट आना , विलम्ब होना
    • मानसिक रोग लग जाना
    • धन हानि हो जाती है
    • संतान प्राप्ति में बाधा आना
    • उचित शिक्षा प्राप्त ना हो पाना
    • पुलिस कार्यवाही होना, कोर्ट – कचहरी के चक्कर में पड़ना आदि

    शनी (Saturn) ग्रह की शांति के उपाय – Shani grah Shanti Upay




    • ताया जी से सम्बन्ध सुधारें
    • चींटियों को काले तिल दें
    • किसी ज़रूरतमंद बुज़ुर्ग को लाठी ख़रीद कर दें जिससे उन्हें चलने में आसानी हो
    • पीपल के वृक्ष के पास सरसों का दिया जलाएँ
    • किसी का पैसा या हिस्सा कदापि न हड़पें , एसी स्थिति में शुभ शनी भी अशुभ फल देने लगता है
    • जामुन के वृक्ष लगाएँ
    • शिव या बजरंगबली की उपासना करें
    • शनी की सम्पूर्ण महादशा में रात्रि में भोजन से पूर्व शनि चालीसा का पाठ अवश्य करें

    यदि कुंडली में शनी शुभ हो तो नीलम धारण किया जा सकता है । नीलम धारण करने से पूर्व किसी योग्य विद्वान को अपनी पत्री अवश्य दिखाएँ । यदि शनी अशुभ हो तो किसी भी सूरत में नीलम धारण न करें । इसे दूध गंगाजल में धोकर पंचधातु में सूर्यास्त के पश्चात मिडल फ़िंगर में शनिवार को पहनें ।

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