सावन में सोमवार को विशेष पूजा से करें भोले को प्रसन्न(shiva worship in sawan)

सावन में सोमवार को विशेष पूजा से करें भोले को प्रसन्न(Shiva worship in Sawan)

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  • सावन के महीने में आने वाले चार या पांच सोमवार का हिंदू कैलेंडर में विशेष महत्व है। सावन में चारों ओर छाई हरियाली से इंसान का गहरा संबंध वेदों में कहा गया है। सावन में वेद पाठ और धर्म ग्रंथों का अध्ययन फलदायी माना गया हैं। सावन के महीने में बारिश के दौरान कई तरह के जीव-जंतु अपने बिलों से बाहर निकल आते हैं और समस्त प्रकृति ऐसी आवाजों और संगीत से वातावरण को बना देती है जैसे प्रकृति खुद ही अपना मौन व्रत तोडक़र बोल रही हो।

    शिव हैं प्रकृति रूप




    सावन के महीने में पूजा या व्रत एक तरह से प्रकृति का पूजन है। शिव को खुद ही प्रकृति का रूप कहा गया है। इस कारण सावन के महीने में शिव पूजा विशेष रूप से की जाती है। सावन के महीने में अत्यधिक वर्षा होने से शिव का जल से विशेष अभिषेक किया जाता है।

    क्यों करते हैं सावन में शिव पूजन – Sawan me shiv Pooja – Shiva worship in Sawan Hindi

    समुद्र मंथन के दौरान निकले अमृत को पाने के लिए सभी लालायित थे लेकिन जब विष निकला तो भगवान शिव ही इसे पीने के लिए आगे आए। उन्होंने जब विष ग्रहण किया, वह सावन का महीना था। विष पीने के बाद शिवजी के तन में गर्मी बढ़ गई और सभी देवी-देवताओं और शिव के भक्तों ने उनको शीतलता प्रदान करने की कोशिश की लेकिन भोले बाबा को शीतलता नहीं मिली। तब महादेव ने चंद्रमा को अपने सिर पर धारण किया और उन्हें शीतलता मिली। इस दौरान मेघराज इंद्र देव ने भी खूब वर्षा की जिससे भगवान शिव को बहुत शांति मिली। तब से भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सावन का महीना मनाया जाता है। सावन महीने के हर सोमवार को शिवजी को जल अर्पित कर उन्हें प्रसन्न किया जाता है।

    सावन के महीने की विशेषता – Shravan Month – Sawan Mahina




    हिंदू धर्म में सावन माह में भगवान शंकर का पूजन होता है। इसे भोलेनाथ का महीना माना जाता है। इस के पीछे एक पौराणिक कथा है जिसके अनुसार, देवी सती ने अपने पिता दक्ष के घर में योगशक्ति से अपने शरीर का त्याग किया था। अपने शरीर के त्याग से पहले देवी ने महादेव को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण लिया था। राजा हिमालय और रानी मैना के घर में देवी सती ने पार्वती के नाम से अपना दूसरे जन्म लिया। देवी पार्वती ने इस जन्म में अपनी युवा अवस्था में सावन के माह में निराहार रहकर कठोर व्रत किया। देवी पार्वती ने भोले नाथ को प्रसन्न करने के लिए व्रत किया। भोलेनाथ पार्वती से प्रसन्न हुए और इस तरह सावन में सोमवार के व्रत रखे जाने लगे।

    संक्रांति के बाद चार या पांच सोमवार विशेष

    सावन के ये व्रत संक्राति के बाद आने वाले पहले सोमवार से शुरू होते हैं। कई बार ये चार तो कई बार पांच भी आते हैं। मान्यता है कि कोई कुंवारी लडक़ी या जिस लडक़ी का विवाह नहीं हो रहा हो, वह यह व्रत पूरी श्रद्धा से करे तो जल्द विवाह हो जाता है और अच्छा जीवन साथी मिलता है।




    सुबह-सवेरे में शिव मंदिर में ऐसे करें पूजा

    सावन में शिव पूजा के लिए सुबह-सवेरे नहा-धोकर शिव मंदिर जाएं। वहां शिव लिंग पर पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, शक्कर) कर से शिव का स्नान कराना चाहिए। इसके बाद जल से शुद्ध स्नान करवाया जाता है। इसके बाद जनेऊ और वस्त्र अर्पित किया जाता है। इसके बाद चंदन, फूल, 108 चावल के दाने, पान पत्ता, लौंग, इलायची, सुपारी, काले तिल, भंाग के पत्ते, बिल्व पत्र, धतूरे के फल-फूल और ऋतु फल चढ़ाने चाहिए। शिव पूजा में केले और दूध का विशेष महत्व है।

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