राहु ग्रह ज्योतिष में – rahu graha in jyotish (north node)

राहु ग्रह ज्योतिष में – Rahu Graha in Jyotish (North Node)

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  • राहु देवता से सम्बन्धित कोई भी जानकारी प्राप्त करने से पूर्व यह जान लेना अति आवश्यक है की राहु कोई खगोलीय पिण्ड नहीं हैं । इनका अपना कोई भौतिक शरीर नहीं है । यही कारण है कि इन्हें छाया ग्रह कहा जाता है । हिंदुस्तान में प्रचलित कथा के अनुसार समुद्र मंथन के समय एक असुर ने चालाकी से अमृत की कुछ बूँदें ग्रहण कर ली थीं । इस असुर को सूर्य व चंद्र देवताओं ने पहचान लिया था और इसकी सूचना भगवान विष्णु को दे दी । भगवान विष्णु जो उस समय मोहिनी नाम की मोहक स्त्री के अवतार में थे , ने अपने सुदर्शन चक्र से इस असुर की गर्दन को धड़ से अलग कर दिया । इस अलग हुए सर को राहु (Rahu) व धड़ को केतु कहा जाता है । इसी वजह से राहु सूर्य व चंद्र से द्वेष रखता है और सूर्य व चंद्र को अपना ग्रास बना लेता है । कुछ समय पश्चात सूर्य या चंद्र राहु के गले से निकल आते हैं और चंद्र या सूर्य ग्रहण समाप्त हो जाता है । राहु देवता (Rahu) को शनी देव की परछाईं की तरह देखा जाता है । स्वभाव से राहु देवता शनी देव से भी क्रूर माने जाते हैं ।

    राहु ग्रह की कुछ विशेषताएं (Rahu Planet in Vedic Astrology)




    रत्न : गोमेध (Gomed)

    धातु: चाँदी

    देवी– देवता : गणेश , माँदुर्गा , शिव

    मित्र ग्रह: शनी , बुध , केतु (Shani, Budh , Ketu )

    गुरु: शुक्राचार्य

    शत्रु ग्रह : सूर्य , चंद्र , मंगल , गुरु

    उच्च राशि : वृष , मिथुन (taurus , gemini )

    नीच राशि : वृश्चिक , धनु

    महादशा समय : 19 वर्ष

    राहु का बीज मंत्र :

    ॐ रां राहवे नमः

    शुभ राहु के लक्षण : Shubh Rahu ke Lakshan

    • छाया ग्रह होने की वजह से यदि राहु शुभ ग्रह के साथ शुभ स्थान में युती बनाये तो शुभ फल देता है
    • युद्ध में विजय दिलवाना
    • राजनीति में सफलता प्राप्त करवाना
    • लग्न में स्थित राहु जातक को सुंदर , आकर्षक व्यक्तित्व का स्वामी बनता है
    • छायाचित्र या फ़िल्म इंडस्ट्री में सफलता दिलाता है
    • आध्यात्मिक कार्यों में रुचि पैदा करना
    • अचानक लाभ पहुँचाता है
    • समुद्री यात्राओं का योग बनता है



    अशुभ राहु के लक्षण : Ashubh Rahu Ke Lakshan

    • राहु अशुभ ग्रह के साथ युती बनाए या अशुभ भाव में हो तो
    • जातक चांडालवत हो जाता है
    • बुद्धी भ्रमित हो जाती है
    • अचानक हानि होना
    • धोखेबाज़ प्रवृत्ति का हो जाना
    • कोर्ट कचहरी से परेशानी पैदा होती है
    • जताक अत्यधिक कामुक हो जाता है
    • झूठा आरोप या लांछन लगना
    • नशे का आदी हो जाना
    • आलसी होना

    अशुभ राहु ग्रह के उपाय : Rahu ke Upay

    • कुंडली में राहु के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिये शनी चालीसा का पाठ करें ।
    • अनाथालय में कम्बल दान करें
    • मंदिर में बिजली के उपकरण दें
    • मज़दूरों , कर्मचारियों से अच्छा बर्ताव रखें
    • ग़रीबों की यथासंभव सहायता करें
    • चींटियों को काले तिल दें
    • घर में सरसों के तेल का दिया जलायें
    • हेराफेरी से बचें, ईमान से ना गिरें
    • ख़ूब पसीना बहायें
    • घर के कूड़ेदान को ढक कर रखें



    राहु का रत्न: (Rahu Ka ratn/Stone)

    यूँ तो राहु के लिए शुभ रत्न गौमेध है । परंतु इसे धारण करने से पूर्व किसी ज्योतिष विद्वान की सलाह अवश्य लें । हमारी जानकारी के अनुसार यदि जातक की कुंडली में राहु शुभ होकर कमज़ोर हो गया हो तो भी गौमेध धारण नहीं किया जायेगा । राहु या केतु के रत्न कुछ विशेष स्थिति में अल्पकाल के लिये ही ग्रहण किये जाते हैं । इसके लिये कुंडली का भली प्रकार विश्लेषण अति आवश्यक हो जाता है ।

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