मां वैष्णो का दरबार- लाखों-करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रतीक(vaishno devi)

मां वैष्णो का दरबार- लाखों-करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रतीक(Vaishno Devi)

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  • भारत के जम्मू कश्मीर की हसीन वादियों में उधमपुर जिले में कटरा से 12 किलोमीटर दूर उत्तर पश्चिमी हिमालय के त्रिकुटा पर्वत पर गुफा में मां वैष्णों का दरबार है। हर रोज कठिन यात्रा कर मां वैष्णों की पवित्र गुफा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली माता वैष्णवी और पवित्र मंदिर दर्शन की नवरात्रों में विशेष मान्यता है। मान्यता है कि मां वैष्णो देवी के दरबार में जो सच्चे दिल से जाता है, उसकी हर मुराद पूरी होती है। मां वैष्णो देवी का यह प्रसिद्ध स्थल हिंदू धर्मावलम्बियों का एक प्रमुख तीर्थस्थल होने के अलावा 51 शक्तिपीठों में भी एक है।

    अपने परम भक्त पर प्रसन्न होकर हुईं प्रकट – Mata Vaishno Devi history in hindi




    मान्यता है कि एक बार पहाड़ों वाली माता ने अपने एक परम भक्त पंडित श्रीधर की भक्ति से प्रसन्न होकर पूरी सृष्टि को अपने अस्तित्व का प्रमाण दिया। कटरा से दो किमी दूर हंसाली गांव में भक्त श्रीधर रहते थे। निसंतान होने से दुखी श्रीधर ने नवरात्रि पूजन के लिए कुंवारी कन्याओं को बुलाया। मां वैष्णों कन्या वेश में उन्हीं के बीच आ बैठीं। पूजन के बाद सभी कन्याएंचली गई पर वैष्णो मां वहीं रहीं और श्रीधर से बोलीं कि अपने घर भंडारे का निमंत्रण सबको देकर आओ। श्रीधर ने आसपास के गांवों में भंडारे का संदेश पहुंचा दिया। वापसी में गुरु गोरखनाथ और उनके शिष्य बाबा भैरवनाथ जी और दूसरे शिष्यों को भी भोजन का निमंत्रण दिया। इसके बाद श्रीधर के घर में अनेक गांववासी आकर भोजन के लिए एकत्रित हुए। कन्या रूपी मां वैष्णो देवी ने सभी को भोजन परोसना शुरू किया। जब वह भैरवनाथ के पास गईं तो उसने कहा कि मैं तो खीर-पूड़ी की जगह मांस और मदिरा पान करूंगा। कन्या रूपी मां ने उसे समझाया लेकिन भैरवनाथ ने जान-बूझकर अपनी बात पर अड़ा रहा। इसके बाद भैरवनाथ ने उस कन्या को पकडऩा चाहा, तब मां वायु रूप धरकर त्रिकूटा पर्वत की ओर उड़ चली। भैरवनाथ भी उनके पीछे गया। मान्यता है कि मां की रक्षा के लिए पवनपुत्र हनुमान भी थे। हनुमानजी को प्यास लगी तो माता ने धनुष से पहाड़ पर बाण चलाकर एक जलधारा निकाली। यह पवित्र जलधारा बाणगंगा के नाम से जानी जाती है। इस दौरान माता ने एक गुफा में प्रवेश कर नौ माह तक तपस्या की। भैरवनाथ भी उनके पीछे वहां पहुंच गया। एक साधु ने भैरवनाथ से कहा कि तू जिसे कन्या समझ रहा है, वह आदिशक्ति जगदंबा है। तू उसका पीछा छोड़ दे। भैरवनाथ ने साधु की बात नहीं मानी। तब माता गुफा की दूसरी ओर से मार्ग बनाकर बाहर निकल गईं। यह गुफा अद्र्धकुमारी या आदिकुमारी या गर्भजून के नाम से विख्यात है। गुफा से बाहर निकल कर कन्या ने देवी का रूप धारण कर भैरवनाथ को चेताया और वापस जाने को कहा। फिर भी वह नहीं माना तो हनुमानजी ने भैरवनाथ से युद्ध किया। जब वीर लंगूर निढाल होने लगा, तब वैष्णवी मां (Mata Vaishno Devi) ने महाकाली का रूप धर कर भैरवनाथ का संहार किया। भैरवनाथ का सिर काटकर भवन से आठ किमी दूर त्रिकूट पर्वत की भैरव घाटी में गिरा। उस स्थान को भैरोनाथ के मंदिर के नाम से जाना जाता है। इसी स्थान पर मां काली (दाएं), मां सरस्वती (मध्य) और मां लक्ष्मी (बाएं) पिंडी रूप में गुफा में विराजित हैं। इन तीनों के सम्मिलत रूप को ही मां वैष्णो देवी के रूप में जाना जाता है।

    दर्शनीय स्थान

    माता का भवन, भूमिका मन्दिर, चरण पादुका, बाणगंगा, अर्द्धकुमारा या गर्भजून, हाथी मत्था, सांझी छत, भैरव मंदिर प्रमुख स्थल हैं। मान्यता है कि भैरवनाथ को दिए वरदान के अनुसार यहां के दर्शन किए बिना वैष्णों देवी की यात्रा पूर्ण नहीं मानी जाती है। देवामाई, चिन्तामणि मन्दिर, रघुनाथ मंदिर भी श्रद्धालु दर्शन के लिए जाते हैं।




    उत्सव-पर्व

    माता वैष्णों देवी (Mata Vaishno Devi) में वर्ष भर में अनेक उत्सव पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाएं जाते हैं। माता वैष्णों देवी मंदिर में चैत्र और आश्विन दोनों नवरात्रियों में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। इन नौ दिनों में प्रतिदिन देश और विदेशों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं। दीपावली पर भी माता का भवन दीपों से जगमगाता है।

    पूजा और आरती का समय

    वैष्णो देवी मां की नियमित पूजा सुबह 4:30 से 6:00 बजे और संध्या पूजा सांय 6:00 बजे से 7:30 बजे तक होती है।

    ऐसे पहुंचे मां के दरबार – Vaishno Devi yatra in hindi

    मां वैष्णो देवी (Mata Vaishno Devi) के दरबार में जम्मू तक बस, टैक्सी, ट्रेन या फिर हवाई जहाज से पहुंच सकते हैं। मां के भवन तक की यात्रा की शुरुआत का बेस कैंप कटरा है जो जम्मू जिले का एक गांव है। जम्मू से कटरा की दूरी लगभग 50 किमी है।

    यात्रा का प्रारंभ कटरा से

    मां वैष्णों देवी यात्रा (Mata Vaishno Devi Yatra) की शुरुआत कटरा से होती है। कटरा से अर्धकुमारी मंदिर 8 और मां के मुख्य मंदिर तक की दूरी लगभग 12 किलोमीटर है। मां की पवित्र गुफा से भैरवनाथ की दूरी लगभग 8 किलोमीटर है। मां के दर्शन के लिए रात-भर यात्रियों की चढ़ाई चढऩे का सिलसिला चलता रहता है। माता के दर्शन के लिए कटरा से निशुल्क यात्रा पर्ची मिलती है।




    कहां से कितना दूर

    • जम्मू से कटरा- 48 किलोमीटर
    • कटरा से वैष्णो देवी- पैदल 13 किलोमीटर
    • दिल्ली से कुल दूरी- 663 किमी

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