आंतरिक शांति के लिए जरूरी है क्षमाशीलता – benefits of forgiveness

आंतरिक शांति के लिए जरूरी है क्षमाशीलता – Benefits of Forgiveness

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  • जब रिश्तों में आंतरिक गतिरोध पैदा होता है तो इसका मूल अहंकार में छिपा होता है। अहंकार का बीज हमारे शांत चित्त में उथल – पुथल की स्थिति पैदा कर देता है जिससे ना चाहते हुए भी मनुष्य निराशा, क्रोध और घृणा से ग्रस्त हो जाता है। जिस व्यक्ति के भीतर अहंकार की भावना जितनी प्रबल होती है उसके अंदर क्षमाशीलता (Kshamashilta) का भाव उतना ही कम होता है, क्षमा श्रेष्ठ और कुलीन आत्माओं का आभूषण होता है।

    क्षमादान क्यों जरूरी है – Maaf Karna Kyu Jruri Hai – Benefits of Forgiveness

    जो व्यक्ति जीवन की प्रतिकूल पगडंडियों पर क्षमाशीलता को अपनाते हुए शांत चित्त होकर आगे बढ़ता है, वह ही अपने गंतव्य पर सफलतापूर्वक ध्वजारोहण करता है।




    जिसने क्षमादान (Kshama Daan) को नहीं अपनाया और उसका अभ्यास नहीं किया, उसके लिए धर्म का दरवाजा कभी नहीं खुलता। क्षमा व्यक्ति के व्यक्तित्व का सबसे महत्वपूर्ण घटक है।

    क्षमा व्यक्ति के व्यक्तित्व को नई ऊंचाई प्रदान करता है, क्षमा ही वह सशक्त माध्यम है जिससे मनुष्य की गरिमा में चार-चाँद लग जाता है। क्षमाशीलता ही सुर और असुर के बीच का अंतर है।

    अलग-अलग धर्मों व समुदाय से होने के बावज़ूद सभी ने क्षमादान को एक मत से स्वीकार किया है, अपने हत्यारों के प्रति प्रभु यीसू ने कहा, ‘हे ईश्वर, इन्हें क्षमा करना, क्योंकि ये अपने कृत्यों से अनभिज्ञ हैं।’ बौद्ध धर्म की मान्यता है कि क्षमाशीलता (Kshamashilta) हानिकारक संवेगों से सुरक्षा प्रदान करती है। इस्लाम धर्म कहता है, ‘अल्लाह सदैव क्षमाशील है।’ हिंदू धर्म में क्षमादान (Forgiveness) को सबसे बड़ा सदाचार कहा गया है। जैन धर्म में कहा गया है, क्षमा साहसी लोगों का आभूषण है।




    आज सांसारिक परिवेश में जो अशांति का माहौल है उसके पीछे क्षमा का ही अभाव है। क्षमादान देना और क्षमा याचना करना दोनों महानता की निशानी हैं। क्षमा देने वाले की भांति क्षमा मांगने वाला भी उतना ही श्रेष्ठ है। अपनी गलती पर क्षमा मांगने से उसके हृदय में विनयशीलता बढ़ती है, इससे उसका कद पहले की अपेक्षा और अधिक बढ़ जाता है।

    अपने मस्तिष्क और मन की शांति के लिए क्षमा को अपनाकर हम खुद को एक शांत चित्त इंसान बना सकते हैं। शांत चित्त से ही आध्यात्मिकता का जन्म होता है। क्षमाशीलता ईश्वर द्वारा मनुष्य को दिया गया सबसे बड़ा उपहार है।

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