हर्निया के कारण और लक्षण  (hernia causes & symptoms)

हर्निया के कारण और लक्षण (Hernia Causes & Symptoms)

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  • हर्निया(Hernia) का अर्थ होता है आंतों का उतरना यानी जब पेट की दीवार के कैविटी से आंतें बाहर निकालना शुरू हो जाती हैं तो उस अवस्था को हर्निया कहते हैं। यह बहुत ही पीड़ादायी होता है। एक बार आंतों के उतरने के बाद जब तक इसे वापस ठीक नहीं किया जाता, तब तक असहनीय लगातार दर्द होता रहता है जो बढ़ता जाता है। कई बार हर्निया का यह दर्द प्राणघातक तक हो जाता है।

    हर्निया या आंतों के उतरने का कारण




    हर्निया(Hernia) वास्तव में कोई रोग नहीं है बल्कि यह तो पेट की दीवार की निर्बलता और कमजोरी को बताता है। जब भी कोई भारी सामान उठाता है तो आंतें अपनी जगह से हिलकर पेट की खाली जगहों की तरफ सरक जाती है जिससे यह समस्या पैदा होती है। यह एक ऐसा भयंकर रोग है जिसे जानते हुए भी लोग इसेगंभीरता से नहीं लेते।

    हार्निया के प्रकार – Types of Hernia

    नाभी या अम्बिलिकल हर्निया : यह हार्निया का सबसे आम रूप है। इसमें रोगी को पेट में समस्या होती है। इस हर्निया में पेट की सबसे अधिक कमजोर मांसपेशी नाभि से बाहर निकाल आती है। ऐसे हार्निया(Hernia) के शिकार अधिकतर वे लोग होते हैं जिनका वजन अधिक होता है। नाभी का हार्निया भी तीन तरह का होता है –

    शैशव नाभी हर्निया : अगर शिशु अधिक जोर से खांसे या छींके तो दबाव के कारण उसकी नाभी बाहर निकल जाती है और वो इसका शिकार हो जाता है। इसमें शिशु की नाभी स्पष्ट रूप से बाहर नजर आने लगती है।

    जन्मजात नाभी बाह्य हर्निया : यह शिशु को जन्म से ही होती है। अगर इसका समय पर इलाज न किया जाए तो यह अधिक घातक हो जाती है।

    व्यस्क परनाभी हर्निया : यह सामान्य हर्निया है जो किसी भी उम्र के लोगों को हो सकता है। यह स्त्रियों में प्रसव के दौरान या गर्भधारण के दौरान अधिक होता है।

    वंक्षण हर्निया : यह हर्निया(Hernia) लोगों की जांघ के जोड़ों में होता है। इस हर्निया में अंडकोष अपना स्थान जांघ की नाली से होते हुए नीचे खिसक जाते हैं। अंडकोषों का आकार धीरे-धीरे बढ़ता है। इसमें ऐसा लगता है कि अंडकोष में सूजन आ गई है। ये एक नई बीमारी हाइड्रोसिल को भी जन्म दे देता है। यह रोग मुख्य रूप से पुरुषों में पाया जाता है।

    फीमोरल हर्निया:हमारे पैरों में एक धमनी होती है जिसका मुख्य कार्य होता है कि वह हमारे पैरों में खून की कमी को पूरा करें। हालांकि कई बार पेट के कुछ अंग जांघ से होकर पैरों की धमनी में पहुंच जाते हैं। इन धमनियों के मुंह से बाहर निकलने लगते है। इस अवस्था को फीमोरल हर्निया कहते हैं। इसकी मुख्य शिकार स्त्रियां होती हैं और यह हर्निया के सभी प्रकारों से पीडि़त रोगियों का कुल 20 प्रतिशत तक होता है।

    इन्सिजनल हर्निया:पेट की सर्जरी कराने पर कभी उन स्थानों से पेट के कुछ अंग बाहर आने की कोशिश करने लगते है। अगर यह संभव हो जाए तो यह हर्निया का प्रतीक होता है। यह अवस्था बहुत दर्ददायी होती है।

    हर्निया के कारण

      • भारी वजन उठाना : हर्निया(Hernia) मुख्य तौर पर तब होता है जब हम कोई भारी वजन उठाते हैं।
      • धूम्रपान : धूम्रपान शरीर में गैस, धुएं को जमा करता है जिससे शरीर में गर्मी पैदा होती है। पेट की दीवारें कमजोर होने पर हर्निया को बढ़ावा देती हैं।



    • जन्म जात : हर्निया कई बार जन्म से ही शिशु को अपना शिकार बना सकता है।
    • चोट लगना : पेट या जांघ मेंचोट लगने पर आपकी धमनियों का मुंह खुला रह जाए तो यह स्थिति भी हर्निया का कारण बनती है।
    • मोटापा : मोटापा कई बीमारियों को जन्म देता है। मोटापा से शरीर में अधिक स्थान रिक्त रहता है जिससे आंतें अपने स्थान से आसानी से खिसक जाती है और हर्निया को जन्म देती है।
    • पुरानी खांसी : पुरानी खांसी या फिर सांस की बिमारी होने से बार-बार आपके पेट पर दबाव पड़ता है जिससे पेट की व्यवस्था बिगड़ जाती है।
    • पेट की मांसपेशियों का कमजोर होना : अगर पेट की मांसपेशियां कमजोर हों तो आपके पेट की दीवारें अपने आप ही कमजोर हो जाएंगी। इस तरह ये आंतों को व्यवस्थित नहीं रख पाती और हर्निया के शिकार हो जाते हो।
    • मूत्र मार्ग में समस्या : हार्निया का एक कारण अंडकोष से भी जुड़ा हुआ है तो मूत्र मार्ग में अवरोध होने पर मूत्राशय में पानी भरना शुरू हो जाता है और अंडकोष का आकार बढ़ जाता है जो हर्निया का ही एक प्रकार है।

    हर्निया के लक्षण – Hernia ke Lakshan

    नाभी स्थान पर असहनीय दर्द : हर्निया के शिकार व्यक्ति को सबसे पहले उसकी नाभि में बहुत दर्द होने लगता है। धीरे-धीरे उसके पेट का आकार बड़ा होने लगता है।

    आंतों का बाहर आना : ऐसा महसूस होने लगता है कि आपकी आंतें पेट से बाहर आ रही हैं। इसको आप अपनी नाभि से जांच भी सकते हो। अगर आपकी नाभि उठी हुई प्रतीत हो तो आपको हर्निया है।

    ज्यादा छींक आना : वैसे तो अधिक छींकों के आने से आपको हर्निया की बीमारी होती है लेकिन हर्निया हो जाने पर अधिक छींकें आने लगती हैं।




    पेशाब करने में परेशानी : अगर आपको पेशाब करने में परेशानी या समस्या हो रही है तो भी आपको हर्निया का खतरा है।

    उल्टी : हर्निया होने पर व्यक्ति कुछ खा नहीं पाता। वह उल्टी करते-करते अपने पेट को भी खाली कर देता है। ऐसे रोगी की दशा दयनीय हो जाती है।

    पेट में भारीपन : पेट में भारीपन महसूस होना हर्निया का लक्षण है। इनमें से कोई भी लक्षण महसूस होने पर तुरंत किसी अच्छे चिकित्सक सलाह लेनी चाहिए।

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