क्या है छुई मुई या लाजवंती? जानें, क्या-क्या हैं इसके फायदे – benefits of mimosa pudica
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क्या है छुई मुई या लाजवंती? जानें, क्या-क्या हैं इसके फायदे – Benefits of Mimosa Pudica

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  • छुई-मुई (Chui-Mui) के नाम से मशहूर फूल का पौधा नाम से चंचल प्रतीत होता है। अंग्रेजी में इसे मिमोसा प्युडिका (Mimosa Pudica) कहते हैं और वानस्पतिक जगत में माईमोसा पुदिका के नाम से जाना जाता है। यह पौधा ज़्यादा नमी वाले स्थानों में पाया जाता हैं। इसके पौधे छोटे होते हैं और उनमें अनेक शाखाएं होती हैं। छुई मुई के पौधे में गुलाबी रंग के होते हैं। यह सच है कि छुई-मुई की पत्तियों को छूने से यह आपस में सिकुडऩे लगती हैं। इसी ख़ूबी के कारण इसे लाजवंती, लजौली, शर्मीली या छुईमुई (Chuimui) भी कहते हैं। छुई-मुई की पत्तियों और जड़ों में एंटीवायरल और एंटीफंगल गुण होते हैं जिस कारण यह कई रोगों से लडऩे में सक्षम है। छुई-मुई से आंखों के काले घेरे, शारीरिक कमजोरी, नकसीर, नपुंसकता, नेत्र रोग, मधुमेह रोग, टॉन्सिल्स, पेट के कीड़े, कब्ज़, फोड़े, गैस, बवासीर जैसी बीमारियों के उपचार संभव हैं।




    छुईमुई या लाजवंती के फ़ायदे – Chui Mui Ka Upyog – Mimosa Pudica

    मधुमेह रोग

    शुगर के रोगियों को लाजवंती (Lajwanti) का काढ़ा पिलाने से बहुत लाभ मिलता है। काढ़ा बनाने के लिए छुई-मुई की 100 ग्राम पत्तियों को 300 मिली पानी में डालकर काढ़ा बना कर मधुमेह के रोगियों को पिला देना चाहिए।

    दूर करें नपुंसकता और कमजोरी

    चार इलायची, चार ग्राम छुई-मुई के पौधे की जड़, चार ग्राम सेमल की छाल को पीसकर एक गिलास दूध में मिलाकर हर रोज रात को सोने से पहले पीने से नपुंसकता की परेशानी में आराम मिलता है। हर रोज रात को सोने से पहले छुईमुई के तीन ग्राम बीजों का चूर्ण बनाकर दूध के साथ लेने से शारीरिक कमजोरी दूर हो जाती है।

    ठीक हो जाता है घाव

    किसी भी तरह का जख्म या घाव हो तो लाजवंती की जड़ का चूर्ण दिन में तीन बार गुनगुने पानी के साथ लेने से जख्म जल्दी ठीक होने लगता है।




    टॉन्सिल्स का उपचार

    टॉन्सिल्स की समस्या हो तो छुई मुई की पत्तों को पीस कर दिन में दो बार गले पर लगाने से टांन्सिल्स के दर्द में तुरंत राहत मिलती है। लाजवंती के इन्हीं गुणों के कारण यह बहुत लोकप्रिंय है। टांसिल्स होने पर इसकी पत्तियों को पीसकर गले पर लगाने से जल्द आराम मिलता है। हर रोज दो बार ऐसा करने राहत मिलती है।

    बवासीर का रोग

    छुईमुई हाजमा दुरुस्त कर कब्ज दूर करती है। लाजंवती (Lajwanti) की जड़ और पत्तों का चूर्ण बनाकर दूध में मिलाकर दिन में दो बार लेने से बवासीर का रोग ठीक हो जाता है।

    खांसी से आराम

    खांसी हो तो छुईमुई के पौधे की जड़ के टुकड़ों की माला बना कर गले में पहन लेने से खांसी में आराम मिलता है। इसकी जड़ को घिसकर शहद में मिलाकर चाटने से या इसकी जड़ को वैसे ही चूसने से खांसी ठीक हो जाती है। इसकी पत्तियों को चबाने से भी गले के दर्द में आराम मिलता है।

    स्तनों का ढीलापन कर दूर

    लाजवंती (Lajwanti) और अश्वगंधा की जड़ों की समान मात्रा में लेप तैयार कर ढीले स्तनों पर हल्के हल्के हाथों से मालिश करें तो स्तनों का ढीलापन दूर हो जाता है। स्तन में गांठ या कैंसर की हो तो इसकी जड़ और अश्वगंधा की जड़ घिसकर लगाने से फर्क पड़ता है।

    दस्त में लाभकारी

    छुईमुई की जड़ों का चूर्ण बनाकर इससे दही के साथ मिलाकर खाने से खूनी दस्त जल्दी बंद हो जाते है। जड़ों से तैयार काढ़ा भी दस्त रोकने में कारगर होता है।

    त्वचा संक्रमण में फायदेमंद

    छुईमुई (Chuimui) की पत्तियों और जड़ों में एंटीमायक्रोबियल, एंटीवायरल और एंटीफंगल गुण होते हैं जो त्वचा संक्रमण होने पर लाभ देते हैं। इसकी पत्तियों के रस को दिन में 3 से 4 बार त्वचा पर लगाने से आराम मिलता है।

    सर्पदंश में भी लाभकारी

    लाजवंती की जड़ का काढ़ा बनाकर शरीर के उस हिस्से पर जहां सांप ने काटा है वहाँ पर उस लेप को लगाने से जहर का असर कम हो जाता है। कई लोग सर्पदंश होने पर रोगी को इसके रस का पीने को देते हैं।

    किडनी में संक्रमण होने पर भी कारगर

    किडनी में संक्रमण हो जाए तो लाजंवती के पूरे पौधे जैसे कि फूल, पत्ते, छाल, बीज और जड़ को पूरा सुखाकर 400 ग्राम पानी में उबालें और जब यह एक चौथाई रह जाएं तो सवेरे खाली पेट पी लें । इससे किडनी का संक्रमण दूर होने में मदद मिल सकती है।

    पेशाब का अधिक आना

    छुईमुई के पत्तों को पानी में पीसकर नाभि के निचले हिस्से में इसका लेप लगाने से पेशाब का अधिक आना बंद हो जाता है। पत्तियों के रस के 4 चम्मच दिन में एक बार लेने से भी लाभ मिलता है।

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