जानिए चंद्र (moon) ग्रह के बारे में – chander grah in jyotish

जानिए चंद्र (Moon) ग्रह के बारे में – Chander Grah in Jyotish

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  • वैदिक ज्योतिष में चंद्र (Moon) संभवत: सबसे अधिक महत्वपूर्ण ग्रह हैं । चंद्र देवता मुख्यतः प्रकाश, मन, माता व शरीर में मौजूद जल के कारक होते हैं । इनका स्वभाव सत्रैन माना जाता है और ये देव ग्रहों की श्रेणी में आते हैं । चंद्र सातवीं दृष्टि से देखते हैं । भारतीय संस्कृति में चंद्र देवता की पूजा अर्चना का प्रचलन वैदिक काल से भी पुरातन है । मन के कारक चंद्र देवता (Moon Devta) की गती सभी नव ग्रहों में सबसे तीव्र होती है । कर्क राशि के स्वामी चंद्र कुंडली के चौथे भाव (4th House) में दिशा बली हो जाते हैं । इनकी महादशा दस वर्ष ( 10 years) की होती है । ये वृष राशि में उच्च व वृषचिक राशि में नीच हो जाते हैं । ज्योतिष शास्त्र में कर्क लग्न (Cancer Lagna) की कुंडली में मंगल देवता को इष्ट देवता माना जाता है । मीन लग्न (Meen Lagna) की कुंडली के इष्ट देव चन्द्रमा देवता होते हैं । रोहिणी , हस्त व श्रवण नक्षत्र चन्द्र देवता से सम्बन्धित होते हैं ।

    चंद्र ग्रह (Chander Grah) की कुछ विशेष जानकारी – Moon Planet Hindi




    दिन: सोमवार

    रंग: दूधिया सफ़ेद

    दिशा: उत्तर पश्चिम

    राशि स्वामी: चंद्र

    नक्षत्र स्वामी: रोहिणी , हस्त व श्रवण

    रत्न: मोती

    धातु: चाँदी

    देव: शिव , बजरंगबली

    मित्र ग्रह: सूर्य, चन्द्र , मंगल

    शत्रु ग्रह: बुध , शनी

    उच्च राशि: वृष

    नीच राशि: वृश्चिक

    महादशा समय: 10 वर्ष

    अशुभ चंद्र के लक्षण : Effects of Malefic Moon – Ashubh Chandra Ke lakshan




    चंद्र का बीज मन्त्र: ॐ श्रां श्रीं श्रौं श्रोक्तम चंद्रमसे नमः

    मन अशांत रहना

    माता को कष्ट मिलना

    घबराहट रहना

    अनिश्ति भय लगा रहना

    घर में दुधारु पशु की मृत्यु अथवा न रहना

    मन में आत्महत्या के विचार आना

    इच्छा शक्ति का कमज़ोर होना

    शुभ चंद्र के लक्षण

    जातक सौम्य प्रवृति का होता है

    सोच सकारात्मक रहना

    जातक मिलनसार व हमेशा प्रसन्न रहने वाला होता है

    व्यवहार कुशल होना व विषम परिस्थिति में भी धैर्य ना खोना

    तीव्र निर्णय क्षमता होना




    चंद्र (Moon) ग्रह की शांति के उपाय – Chandr grah Shanti Upay

    सोमवार का व्रत रखें (Monday Fast) । माता को प्रसन्नन रखें , माँ की सेवा करें । सोमवार को दूध का दान करें । दहीं, दूध, चावल, सफ़ेद वस्त्र का सोमवार को दान करने से चंद्र के पाप प्रभाव में कमी आती है । माता व माता तुल्य स्त्रियों का आशीर्वाद प्राप्त करें । यदि चंद्र कुंडली में शुभ स्थित हों तो दाहिने हाथ की सबसे चोटी उँगली में मोती धारण करें । मोती सूर्यास्त के बाद सायंकाल में धारण करें ।

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