बौद्ध धर्म : इतिहास और अन्य जानकारी(history of bodh dharm)

बौद्ध धर्म : इतिहास और अन्य जानकारी(History of Bodh Dharm)

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  • आइए बौद्ध धर्म के बारे में जानें

    बौद्ध धर्म का जन्म हिंदू धर्म से ही माना जाता है। हालांकि, यह भी बड़े ताज्जुब की बात है कि भारत को छोड़ बौद्ध धर्म पूरे एशिया का सबसे बड़ा धर्म है जबकि पूरे विश्व में इस धर्म और दर्शन से जुड़े लोगों की संख्या चौथे नंबर पर है। यह धर्म हिंदू धर्म की श्रमण परम्परा से निकला दर्शन माना जाता है। इसके संस्थापक महात्मा बुद्ध (सिद्धार्थ गौतम) थे। बुद्ध शरीर रूप में 563 ईसा पूर्व से 483 ईसा पूर्व तक रहे। उनके महानिर्वाण के बाद उनकी शिक्षाएं अगली पांच शताब्दियों में बौद्ध धर्म के रूप में पूरे एशिया महाद्वीप भारतीय उपमहाद्वीप में फ़ैला और अगले दो हज़ार सालों में मध्य, पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी जम्बू महाद्वीप में भी फैलीं। चीन, तिब्ब्त, थाइलैंड, जापान आदि देशों में बौद्ध धर्म बड़ी तेजी से फैला। हालांकि, कुछ कारणों से भारत देश बौद्ध धर्म के प्रभाव से अछूता रह गया जिन्हें बाद में विस्तार से आपके सामने रखेंगे।




    महात्मा बुद्ध महान राजा या सन्यासी

    बुद्ध का वास्तविक नाम सिद्धार्थ था। उनका जन्म कपिलवस्तु (शाक्य महाजनपद की राजधानी) के पास लुंबिनी (दक्षिण मध्य नेपाल) में हुआ। इस जगह से तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में सम्राट अशोक ने बुद्ध की स्मृति में एक स्तंभ बनाया था। सिद्धार्थ के पिता शाक्यों के राजा शुद्धोदन थे। बुद्ध से जुड़ी कथा कहती है कि उनकी माता महामाया उनके जन्म के कुछ देर बाद मर गई थी। बुद्ध यह उस समय के सिद्धार्थ के जन्म पर 8 ऋषियो को बुलाया गया। इनमें उस समय के ज्योतिष विद्वान भी थे। सभी ने उनके संबंध में सिद्धार्थ के एक महान राजा या सन्यासी या परिव्राजक बनने की संभावनाएं जताईं। भविष्यवाणी सुनकर राजा शुद्धोदन ने किसी भी तरह सिद्धार्थ को साधु न बनने देने को अपने स्तर पर कड़े प्रयास किए।

    बुद्ध के जीवन से जुड़ी कथा

    बुद्ध के बचपन के बारे में प्रचलित है कि उनके लिए पिता राजा शुद्धोदन ने ऐसी व्यवस्था कर रखी थी कि उन्हें दुख, बीमारी, रुगणता, बुढ़ापा या मृत्यु जैसे अटल सत्यों का भान न मिल सके। कथा है कि बुद्ध एक युवा महोत्सव में भाग लेने जा रहे थे जब उन्होंने पहली बार किसी बुढ़े व्यक्ति को देखा। इसके बाद उन्होंने किसी की अर्थी निकलते देखी और उनके मन में विराग उत्पन्न हुआ। पहली बार उन्हें मानव जीवन के कष्टों का पता चला। उनके मन में धर्म की लौ पहली बार जगी। इसके बाद सिद्धार्थ गौतम अपनी पत्नी और बेटे राहुल को छोड़ कर सत्य की खोज में निकल पड़े

    बौद्ध धर्म के तीन संप्रदाय हैं :

    हीनयान या थेरवाद, महायान और वज्रयान। हीनयान को बौद्ध धर्म का प्रमुख संप्रदाय माना जाता है। दुनिया भर में अठतीस करोड़ से ज्यादा लोग बौद्ध धर्म को मानते हैं।




    बुद्धत्व से पहले की अवस्था बोधिसत्व

    बौद्ध धर्म में दस पारमिताओं का पूरा पालन करने वाला बोधिसत्व कहलाता है। जब दस बलों या भूमियों (मुदिता, विमला, दीप्ति, अर्चिष्मती, सुदुर्जया, अभिमुखी, दूरंगमा, अचल, साधुमती, धम्म-मेघा) को प्राप्त कर लेते हैं, तब कोई बुद्ध कहलाते हैं। सादे शब्दों में कहें तो बुद्धत्व से पहले की अवस्था बोधिसत्व है। बस, जो बुद्ध होने को है, उसे बोधिसत्व कहा जाता है। हालांकि, ऐसा भी जरूरी नहीं कि जो बोधिसत्व हो, वह बुधत्व को प्राप्त हो ही जाए। बुद्ध बनना ही एक बोधिसत्व के जीवन का सर्वोच्च शिखर है।

    कोई भी बन सकता है बुद्ध

    बौद्ध मानते हैं कि बुद्ध शाक्यमुनि केवल एक बुद्ध हैं – उनके पहले बहुत सारे थे और भविष्य में और होंगे। बौद्ध धर्म मानता है कि अपने अंतर में उतर कर ध्यान और विराग से कोई भी बुद्ध बन सकता है। इसके लिए दस पारमिताओं का पालन कर पहले बोधिसत्व पाने और इसे पाकर दस बलों या भूमियों को साध लें।




    संसार सिर्फ दुख है

    बौद्ध धर्म का आधार इस बात पर टिका है कि यह संसार दुख के सिवाय कुछ नहीं। इसलिए इसका अंतिम लक्ष्य भी संपूर्ण मानव समाज से दुख का अंत करना है। बौद्ध धर्म के अनुयायी अष्टांग मार्ग के अनुसार जीकर अज्ञानता और दुख से मुक्ति पा सकते हैं।

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