बौद्ध धर्म के चार तीर्थ(bodh dharm)

बौद्ध धर्म के चार तीर्थ(Bodh Dharm)

  • Lifestyle हिन्दी
  • no comment
  • इतिहास, धर्म-संस्कृति
  • 2892 views
  • बौद्ध धर्म के संस्थापक महात्मा बुद्ध (सिद्धार्थ गौतम) थे! इनका जन्म 563 ईसा पूर्व को हुआ था! यह शरीर रूप में 483 ईसा पूर्व तक रहे थे! बौद्ध धर्म मुख्या रूप से चीन, तिब्बत, जापान और थाइलैंड आदि देशों में तेजी से फैला था! भाषा की दृष्टि से बौद्ध धर्म की तीन शाखाएं मानी जाती हैं; हान भाषा में प्रचलित बौद्ध धर्म, तिब्बत भाषी बौद्ध धर्म और पाली भाषी बौद्ध धर्म। चीन में बौद्ध धर्म के भिक्षुओं की कुल संख्या लाखों में है। चीनी रिपोर्टों के अनुसार, मौजूदा समय में चीन में 13 हज़ार से ज्यादा बौद्ध मंदिर हैं जहां कोई भी बौद्ध अनुयायी, पर्यटक या दर्शक जा सकते हैं।

    भगवान बुद्ध के अनुयायिओं के लिए विश्व भर में चार मुख्य तीर्थ मुख्य माने जाते हैं :




    1. (1) लुम्बिनी – जहां महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ।
    2. (2) बोधगया – जहां बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त हुआ।
    3. (3) सारनाथ – जहां से बुद्ध ने दिव्यज्ञान देना प्रारंभ किया।
    4. (4) कुशीनगर – जहां बुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ।

    लुम्बिनी
    यह स्थान नेपाल की तराई में नौतनवां रेलवे स्टेशन से 25 किलोमीटर और गोरखपुर-गोंडा लाइन के नौगढ़ स्टेशन से करीब 12 किलोमीटर दूर है। अब तो नौगढ़ से लुम्बिनी तक पक्की सडक़ भी बन गई है। गौतम बुद्ध का जन्म यहीं हुआ था। हालांकि, यहां के बुद्ध के समय के अधिकतर प्राचीन विहार नष्ट हो चुके हैं। केवल अशोक का एक स्तंभ अवशेष के रूप में इस बात की गवाही देता है कि भगवान बुद्ध का जन्म यहां हुआ था। इस स्तंभ के अलावा एक समाधि स्तूप में बुद्ध की एक मूर्ति है। नेपाल सरकार ने भी यहां पर दो स्तूप और बनवाए हैं।

    Lumbini

    Lumbini Source : Wikipedia

    बोधगया
    करीब छह साल तक जगह-जगह और विभिन्न गुरुओं के पास भटकने के बाद भी बुद्ध को कहीं परम ज्ञान न मिला। इसके बाद वे गया पहुंचे। आखिर में उन्होंने प्रण लिया कि जब तक असली ज्ञान उपलब्ध नहीं होता, वह वृक्ष के नीचे से नहीं उठेंगे, चाहे उनके प्राण ही क्यों न निकल जाएं। इसके बाद करीब छह दिन तक दिन रात एक वट वृक्ष के नीचे भूखे-प्यासे तप किया। आखिर में उन्हें परम ज्ञान उपलब्ध हुआ। जिस वृक्ष के नीचे वह बैठे, उसे बोधि वृक्ष कहा जाता है। वहीं गया को तक बोध गया के नाम से जाना जाता है।

    Bodh_Gaya

    Bodh Gaya Source : Wikipedia



    सारनाथ

    बनारस छावनी स्टेशन से छह किलोमीटर, बनारस-सिटी स्टेशन से साढ़े तीन किलोमीटर और सडक़ मार्ग से सारनाथ चार किलोमीटर दूर पड़ता है। यह पूर्वोत्तर रेलवे का स्टेशन है और बनारस से यहां जाने के लिए सवारी तांगा और रिक्शा आदि मिलते हैं। सारनाथ में बौद्ध-धर्मशाला है। यह बौद्ध तीर्थ है। लाखों की संख्या में बौद्ध अनुयायी और बौद्ध धर्म में रुचि रखने वाले लोग हर साल यहां पहुंचते हैं। बौद्ध अनुयायिाओं के यहां हर साल आने का सबसे बड़ा कारण यह है कि भगवान बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश यहीं दिया था। सदियों पहले इसी स्थान से उन्होंने धर्म-चक्र-प्रवर्तन प्रारंभ किया था। बौद्ध अनुयायी सारनाथ के मिट्टी, पत्थर एवं कंकरों को भी पवित्र मानते हैं। सारनाथ की दर्शनीय वस्तुओं में अशोक का चतुर्मुख सिंह स्तंभ, भगवान बुद्ध का प्राचीन मंदिर, धमेख स्तूप, चौखंडी स्तूप, आदि शामिल हैं।

    Sarnath

    Sarnath Source: Wikipedia

    कुशीनगर
    कुशीनगर बौद्ध अनुयायिओं का बहुत बड़ा पवित्र तीर्थ स्थल है। माना जाता है कि महात्मा बुद्ध कुशीनगर में ही महापरिनिर्वाण को प्राप्त हुए। कुशीनगर के समीप हिरन्यवती नदी के समीप बुद्ध ने अपनी आखरी सांस ली। रंभर स्तूप के निकट उनका अंतिम संस्कार किया गया। उत्तर प्रदेश के जिला गोरखपुर से 55 किलोमीटर दूर कुशीनगर बौद्ध अनुयायिओं के अलावा पर्यटन प्रेमियों के लिए भी खास आकर्षण का केंद्र है। 81 वर्ष की आयु में शरीर त्याग से पहले भारी संख्या में लोग बुद्ध से मिलने पहुंचे। माना जाता है कि 120 वर्षीय ब्राह्मण सुभद्र ने बुद्ध के वचनों से प्रभावित होकर संघ से जुडऩे की इच्छा जताई। माना जाता है कि सुभद्र आखरी भिक्षु थे जिन्हें बुद्ध ने दीक्षित किया।

    Kushinagar

    Kushinagar Source : Wikipedia

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *