आलोचना को खुले दिल से करें स्वीकार – accept your criticism

आलोचना को खुले दिल से करें स्वीकार – Accept Your Criticism

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  • आलोचना, सबके जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है। अगर आप ज़िंदा हैं और आपकी साँसे चल रहीं हैं तो आप आलोचना (Aalochna) से नहीं बच सकते हैं। लेकिन अगर कोई आपकी आलोचना कर रहा है तो उसको शांत दिमाग से सुने और उसका विश्लेषण करें उसके बाद ही अपनी कोई प्रतिक्रिया व्यक्त करें। आलोचना करने वाला व्यक्ति आपका मित्र और शत्रु दोनों हो सकता है अब ये आपकी समझदारी पर निर्भर करता है कि आप दोनों कि आलोचनाओं को कैसे लेते हैं। महात्मा गाँधी के अनुसार “आलोचना करना बहुत आसान होता है पर उसे सुनकर आत्म सुधार करना बहुत महत्वपूर्ण कार्य है”। हर आलोचना (Criticism) आपको नीचा दिखने के लिए नहीं की जाती ऐसे में कुछ बातों पर जरूर ध्यान दें।




    अपनी आलोचना को स्वीकार करें – Apni Aalochna Ko Kare Swikar – Accept Your Criticism in Hindi

    आलोचना की सच्चाई – Fact of Criticism

    अगर कोई व्यक्ति आपकी आलोचना कर रहा है तो क्यों कर रहा है? क्या जो वह कह रहा है उसमे कुछ तर्क या सच्चाई है या फिर वो आपको नीचा दिखाने के लिए ये सबकर रहा है। अगर आलोचना में कोई भी सच्चाई है तो उसपर काम करना आपका फ़र्ज़ है वरना उसपर ध्यान देने की कोई जरूरत नहीं है।

    भावनाओं पर करें नियंत्रण:

    शास्त्रों में भी आलोचना (Aalochna – Criticism) और आलोचक का बहुत महत्व बताया गया है। गोस्वामी तुलसी दास ने तो कहा है कि निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छवाय बिन पानी साबुन बिना निर्मल करे सुभाय। यानी बिना किसी फीस के ही आपका निंदक आपको एक अच्छा इंसान बनने के लिए प्रेरित कर रहा है। अब आपकी जिम्मेदारी बनती है कि आप उसके साथ सम्मानपूर्वक बर्ताव करें। भावनाओं में बहकर उसको कुछ ऐसा ना बोल दें कि वह व्यक्ति आपका शत्रु बन जाए और आपके रिश्तें में दरार आ जाये। आलोचना सुनकर सकारात्मक रहना हर किसी के बस की बात नहीं होती है।




    आलोचना सोचने पर करती है विवश:

    आलोचना की सबसे अच्छी बात यह होती है कि यह आपको सोचने पर मजबूर कर देती है। ऐसे में आपका स्वभाव और निखरकर सामने आता है। तारीफ पर आप ज्यादा से ज्यादा खुश हो सकते हैं लेकिन आलोचना में ही सुधार की ताकत होती है। आपको आपका बेहतरीन वर्जन बनाने पर विवश कर देता है।

    निंदा (Ninda) की सच्चाई करें स्वीकार:

    भले ही आप दुनिया से भागे और स्वीकार ना करें की आपमें कोई कमी है लेकिन लोगों को आपकी कमियां आसानी से दिख रहीं हैं तो ऐसे में घबराने की कोई जरूरत नहीं है। आलोचना को स्वीकारें और उस पर काम करने शुरू करें।
    कुछ आलोचनाएं इसलिए की जाती है कि आप खुद में सुधार करें जबकि कुछ आलोचनाओं का उद्देश्य ही आपको हीन भावना से ग्रसित करना होता है। ऐसे में बारी आती है आपकी बुद्धि की, आलोचना का विश्लेषण करना उसे स्वीकार करना या नकारना दोनों ही पूरी तरह से आप पर निर्भर करता है। अगर आपको ऐसा लगता है सामने वाले की बातों में दम है तो आपको आपने तरीकों में बदलाव करने की जरूरत है और आलोचना सिर्फ बैर भावना से प्रेरित है तो उसे नजरअंदाज करके आगे बढ़ना भी आना चाहिए। एक समझदार इंसान अपनी भलाई और बुराई बहुत ढंग से समझता है।

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