जायके के साथ तिल के औषधीय लाभ (benefits of sesame in hindi)

जायके के साथ तिल के औषधीय लाभ (Benefits of Sesame in Hindi)

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  • भारतीय रसोई और खानपान में तिल का बहुत महत्व है। सर्दियों के मौसम में तो तिल खाने से शरीर को ऊर्जा और गर्माइश मिलती है जिससे शरीर सक्रिय रहता है। तिल में कई प्रोटीन, कैल्शियम और कार्बोहाइट्रेड आदि होते हैं। त्वचा की खूबसूरती बनाए रखने के लिए भी तिल का उपयोग अहम है। तिल तीन तरह के होते हैं- काले, सफेद और लाल। लाल तिल का प्रयोग बहुत कम किया जाता है। तिल का तेल भी बहुत फायदेमंद होता है। तिल के औषधीय गुण भी काफी हैं।

    तिल के फायदे (Til Ke Fayade)




    तिल में सेसमीन नाम का एंटी-ऑक्सिडेंट होता है जो कैंसर की कोशिकाओं को बढऩे से रोक कर कैंसर से सुरक्षा देता है। साथ ही यह फेफड़ों का कैंसर, पेट के कैंसर, ल्यूकेमिया, प्रोस्टेट कैंसर, स्तन कैंसर और अग्नाशय के कैंसर के प्रभाव को कम करने में काफी मददगार है।

    हृदय को स्वस्थ्य रखने में कारगर

    हृदय की मांसपेशियों को स्वस्थ रखने में भी तिल मदद करता है। तिल(Til) में जरूरी मिनरल जैसे कैल्सियम, आयरन, मैग्नेशियम, जिंक, और सेलेनियम होता है जो हृदय के मांसपेशियों को सुचारु काम करने में मदद करता है।

    मिल में मौजूद नियासिन नाम का विटामिन तनाव और अवसाद को कम करने में मदद करता है।

    बच्चों की हड्डियों को मजबूती

    तिल(Til) का सेवन शिशु की हड्डियों को मजबूती देता है। इसमें डायटरी प्रोटीन और अमिनो एसिड होता है जो बच्चों के हड्डियों के विकास और मजबूती देते में मदद करता है। 100 ग्राम तिलों में 18 ग्राम प्रोटीन होता है जो बच्चों के विकास के लिए बहुत जरूरी है।




    बवासीर में लाभकारी

    तिल(Til) का नियमित सेवन करने से बवासीर भी ठीक हो जाता है। बवासीर की समस्या होने पर रोज दो चम्मच काले तिल को चबाकर खाइए और फिर ठंडा पानी पीजिए।

    ब्लड सर्कुलेशन को करे ठीक

    तिल का तेल त्वचा में आसानी से मिल जाता है जिससे यह त्वचा को अंदर से पोषित करता है। तिल के तेल की नियमित मालिश से ब्लड सर्कुलेशन सही रहती है और क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की मरम्मत हो जाती है।

    तिल है एंटी-बैक्टीरियल

    तिल(Til) में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल गुण किसी भी घाव को जल्द ठीक कर देते हैं। किसी भी सूजन में आराम देता है और सोराइसिस और एक्जिमा जैसी त्वचा की परेशानियों को दूर करने में भी मदद करता है। वहीं जले हुए स्थान पर देशी घी और कपूर के साथ तिल के तेल को मिलाकर जले स्थान पर लेप लगाने से फायदा मिलता है।

    • तिल दातों को मजबूत और चमकदार बनाते हैं। सुबह ब्रश करने के बाद काले तिलों को बारीक चबाकर खाना चाहिए। यह प्राकृतिक रूप से दांतों को सुंदर और मजबूत बनाता है। दांत में दर्द होने पर थोड़ा सा तिल के तेल से मुंह में कुला करें, दर्द गायब हो जाएगा।
    • तिल के तेल को सिर पर लगाने से बालों का झडऩा, उनका सफेद होना और गंजेपन की शिकायत दूर करता है।
    • जोड़ों में दर्द हो या कमर का दर्द हो, तिल के तेल में थोड़ा हींग और सोंठ डालकर गर्म कर इस तेल से मालिश करें। कमर और जोड़ों के दर्द से राहत मिलेगी।
    • पैर पर मोच आने पर तिलों को पीसकर इसका पेस्ट बनाकर मोच वाली जगह पर इसका लेप लगाने से राहत मिलेगी।
    • बच्चा सोते समय पेशाब करता हो तो भुने काले तिलों को गुड़ के साथ मिलाकर उसका लड्डू बना कर रोज रात को सोने से पहले खिलाइए। बच्चों को सोते वक्त पेशाब नहीं करेगा।
    • काले तिल एक चम्मच खाने के बाद चबा-चबा कर खाएं। ऐसा करने से मोटापा दूर हो जाएगा।
    • मुंह में छाले होने पर तिल के तेल में थोड़ा सा सेंधा नमक मिला कर मुंह के छालों में लगाने से छाले ठीक हो जाते हैं।
    • गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने में मदद करता है। तिलों में मौजूद फोलिक एसिड गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने में मददकारी है।
    • गर्भाशय की पीड़ा में तिलों को बारीक पीसकर तिल के ही तेल में मिलाकर गर्म करके नाभि के भाग में धीरे-धीरे लेप करने से शीत जन्यपीड़ा शांत हो जाती है।
    • शीघ्र प्रसव के लिए 70 ग्राम की मात्रा में काले तिल कूटकर 24 घंटे के लिए पानी में भिगों दे। सुबह उन्हें छानकर प्रसव महिला को पीलाने से बच्चा शीघ्र होगा।
    • यदि सर्दी से सूखी खांसी हो तो 4-5 चम्मच मिश्री और इतने ही तिल मिला लें। इन्हें एक गिलास में आधा पानी रहने तक उबाले। इसे हर रोज सुबह सायं और रात्रि के समय पीएं।
    • जाड़े के दिनों में गुड़ तिल की गर्म ताजा गजक खाने से अधिक पेशाब आना और गले की खुजली ठीक हो जाती है।
    • शिशुओं के लिए तेल मालिश के काम आता है। तिल के तेल से शिशुओं को मालिश करने पर उनकी मांसपेशियां मजबूत होती हैं और उनका अच्छा विकास होता है।
    • कान में दर्द होने पर तिल के तेल में लहसुन की तीन-चार कलियां भून लीजिए। उस तेल की दो-तीन बूंदें कान में डालिए, दर्द ठीक हो जाएगा।
    • फटी एडिय़ों पर गर्म तिल के तेल में सेंधा नमक और मोम मिलाकर लगाने से फायदा मिलता है।
    • तिलों के सेवन से भूख बढ़ती है जो नर्वस सिस्टम को बल देता है। यह वात, पित्त और कफ को नष्ट करता है।

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