तेज पत्ता (bay leaf) के उपयोग और फायदे

तेज पत्ता (Bay Leaf) के उपयोग और फायदे

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  • ऐसी कोई विरली ही भारतीय रसोई होगी जहां खाना बनाने में तेजपत्ते (Bay Leaf) का उपयोग न होता हो। तेज पत्ता पुराने समय से भारत में उगाया जाता रहा है। हालांकि, समय के साथ और इसकी उपयोगिता जानने के बाद अन्य देशों में भी यह उगाया जाने लगा। हरी पत्तियों के अलावा तेज पत्ते की सूखी पत्तियों का भी खूब इस्तेमाल किया जाता है। घास-फूस श्रेणी का यह पौधा पुराना होने पर छोटे पेड़ का रूप ले लेता है। बसंत के मौसम में इसकी पैदावार ज्यादा होती है। तेज पत्ते का पौधा 25 फीट तक लंबा और 6 फीट तक चौड़ा पेड़ होता है। अंडाकार और नुकीली पत्तियों की पत्तियों की लंबाई 3 इंच तक होती है। तेज पत्ते में पीले रंग के फूल और उतपत्त, यूजीनाल और आइसो यूजीनाल, तीन तरह के तेल पाए जाते हैं। हिंदीभाषी क्षेत्रों में इसे तेजपात या तेज पत्ता और संस्कृत में तमालपत्र कहते हैं। इसमें एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगस और एंटी-ऑक्सीडेंट गुण भरपूर मात्रा में होते हैं। यही कारण है कि इसे खाने के एक मसाले के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इसमें कॉपर, पोटाशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, सेलेनियम और आयरन काफी मात्रा में होते हैं। औषधीय गुणयुक्त तेज पत्ते (Bay Leaf) के तेल से स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद कई प्रकार के ऑयंटमेंट बनते हैं।

    तेज पत्ते के अनगिनत फायदे – Tej Patta ke fayde – Bay Leaves Benefits Hindi




    • कपड़ों के बीच तेजपत्ता रखने से महंगे रेशमी, ऊनी और सूती कपड़ों में कीड़ा नहीं लगता। अनाज के बीच में 4-5 पत्ते डालने से भी यह कीड़ों से बचा रहेगा।
    • हृदय मजबूत बनाए रखने के लिए और हृदय रोग से बचने के लिए के लिए तेजपत्ते (Bay Leaf) को भोजन में लगातार इस्तेमाल करें।
    • दमा होने पर तेजपत्ता, पीपल, अदरक, मिश्री को बराबर मात्र में पीस कर 1-1 चम्मच हर रोज 40 दिनों तक खाना लाभकारी होगा।
    • तेजपत्ते के 5-6 पत्तों को एक गिलास पानी में तब तक उबालें जब तक कि पानी आधा न रह जाए। अब इस पानी से रोजाना सिर की मालिश करं। सिर में जुएं नहीं होंगी।
    • ऐसी मान्यता है कि तेजपत्ते (Bay Leaves) के टुकड़ों को जीभ के नीचे रखकरचूसते रहने से एक महीने में हकलाना खत्म हो जाता है।
    • तेजपत्तों के पाउडर की चाय पीने से सर्दी-जुकाम, छींकें आना, नाक बहना, जलन, सिरदर्द आदि में बहुत जल्द आराम मिलता है।
    • दांतों की प्राकृतिक चमक और सफेदी पाने के लिए सुबह-शाम तेजपत्तों (Bay Leaf) का बारीक चूर्ण दांतों पर मलना चाहिए। इससे जहां दांत मजबूत होगें, इनमें ठंडा या गरम नहीं लगेग।
    • खांसी होने पर एक चम्मच तेजपत्ते का चूर्ण शहद में मिलाकर खाने से आराम मिलता है।
    • तेजपत्ते का काढ़ा बनाकर पीने से पेट का फूलना, अतिसार, उबकाई आदि में लाभ मिलता है। 2-4 ग्राम चूर्ण का सेवन करना भी फायदेमंद है।
      • अगर जुराबों से दुर्गंध आती है तो तेजपत्ते (Tej Patta) का चूर्ण पैर के नीचे मल कर मोजे पहनने चाहिए। मुंह से दुर्गंध आने पर तेजपत्ते का टुकड़ा चबाने और पसीने की बदबू दूर करने के लिए तेजपत्ते का चूर्ण बगलों में लगाना फायदेमंद है।
      • आंखों की रोशनी कम होने पर तेजपत्ते के बारीक चूर्ण को सुरमे की तरह लगाने से आखों की सफाई और नसों में ताजगी आ जाएगी और नजर तेज हो जाएगी। इसके लगातार सेवन से चश्मा तक उतर सकता है।
      • आटे के डिब्बे में तेजपत्ता (Tej Patta) रखने से चींटियां नहीं लगती और आटे में नमी भी नहीं आएगी।
      • पेट में गैस और एसीडिटी की तकलीफ होने पर तेजपत्ते का काढ़ा पीने से आराम मिलेगा। दस्त, आंतों के घाव और भूख न लगने पर भी तेजपत्ते का सेवन फायदेमंद है।



    • पुराने जमाने में तेज पत्ते को गर्भपात करने की एक औषधि के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता रहा है। तेज पत्ते में लोरिक एसिड की मौजूदगी इसे कीटनाशी गुणों से युक्त करती है। ऐसे में इसका इस्तेमाल कीट-पतंगों को दूर रखने के लिए भी किया जाता है।
    • तेज पत्ते (Tej Patte) में मौजूद कई गुण इसे उच्च रक्त शर्करा, माइग्रेन, सिर दर्द, बैक्टीरियल और गैस्ट्रिक अल्सर के इलाज में खासा उपयोगी बनाते हैं।
    • तेज पत्ता (Bay Leaves) और जामुन को उनके कसैले, स्वेदजनक, पाचन, मूत्रवर्धक, उबकाई और भूख बढ़ाने वाले गुणों के लिए भी खाने में इस्तेमाल किया जाता है।
    • तेज पत्ते में मौजूद एक यौगिक पर्थेनोलाइड माइग्रेन के उपचार में उपयोगी है। इसके अलावा आम तौर पर होने वाले सिर दर्द के लिए भी इसे एक हर्बल उपचार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
    • तेज पत्ते (Bay Leaf) शरीर की इंसुलिन प्रक्रिया को संतुलित करने में काफी सहायक होता है। इसके चलते यह रक्त में सूगर के स्तर में कमी करता है और डायबिटीज के उपचार में भी लाभ्प्रद है।
    • तेज पत्ता पेट में होने वाले अल्सर के प्रभाव को भी कम करता है। तेज पत्ते में जो जलनरोधी और एंटी-ऑक्सीडेंट गुण होता है। इन्हीं गुणों के कारण तेज पत्ता कवक रोधी और जीवाणु रोधी माना गया है।

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