क्या है स्वाइन फ्लू?, कैसे करें इससे बचाव – what is swine flu?

क्या है स्वाइन फ्लू?, कैसे करें इससे बचाव – What is Swine Flu?

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  • स्वाइन फ्लू (Swine Flu) एक घातक और संक्रामक बीमारी है जो एच1 एन1 (H1 N1) नामक विषाणु की वजह से फैलती है। यह किसी भी आयु वर्ग के व्यक्ति, बच्चे या महिला को हो सकता है। यह वायरल रोग दूषित वातावरण, हवा और श्वसन समस्याओं से फैल सकता है। कई शोध स्वाइन फ्लू बीमारी के लक्षण बताते हैं और जैसे ही किसी में ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टरी जांच करवाएं वरना यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है।

    स्वाइन फ्लू के कारण और इलाज – Swine Flu Ka Ilaj – Symptoms & Treatment




    स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखें तो जाएं डॉक्टर के पास – Swine Flu Ke Lakshan

    तेज बुखार, सिर दर्द, ठंड, कंपकंपी, गले में खराश, छींकना, लगातर नाक से पानी का प्रवाह, सांस लेने में कठिनाई और थकान रहना स्वाइन फ्लू के कुछ बहुत ही प्रदर्शित लक्षण हैं। ये लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाकर उपचार लें वरना यह बीमारी घातक हो सकती है।

    स्वाइन फ्लू का मामला उजागर होने पर स्कूली बच्चों की जांच करवाएं

    किसी भी क्षेत्र में स्वाइन फ्लू का एक भी मामला उजागर होने पर अपने बच्चों खासकर स्कूल जाने वाले बच्चों की डॉक्टरी जांच अवश्य करवाएं। स्कूल जाने वाले बच्चे इस बीमारी के लिए आसान शिकार होते हैं। कारण यह कि स्कूल में बहुत सारे बच्चों का आपस में मेलजोल होता है। किसी भी बच्चे में एन१एच१ वायरस का संक्रमण होने से दूसरे बच्चों में फैलने का डर रहता है। वहीं यह भी काबिलेगौर है कि यह बीमारी अकसर सर्दियों में ज्यादा संक्रामक होती है। ऐसे में ठंड के मौसम में ज्यादा एहतियात रखें।

    स्वाइन फ्लू से बाचव के कारगर उपाय – Swine Flu Ke Gharelu Upchar

    देश में स्वाइन फ्लू के संक्रमण को रोकने में आहार में स्वस्थ तत्वों को शामिल करना फायदेमंद है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऑक्सीडेंट विरोधी तत्वों से समृद्ध पदार्थों की खपत से शरीर की प्रतिरोधी क्षमता बढ़ सकती है। ऐसे में ताजा फल और हरी सब्जियों आहर में शामिल करें। वहीं बेहद कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले व्यक्ति को आहार में मांस, मछली और सोया जैसे पौष्टिक तत्व शामिल करने चाहिए। ताजा गाजर, आंवला और पालक का रस भी एच1एन1 वायरस से लडऩे में सहायक है। अपने आहार में ताजा फल-सब्जियां और जितना संभव हो सके कई तरह के तरल पदार्थ जैसे वनस्पति सूप और जूस का सेवन करें।

    एंटी-ऑक्सीडेंटिव (Antioxidative) गुण युक्त पदार्थ लाभकारी

    तुलसी, लहसुन और हल्दी जैसे भारतीय मसाले और जड़ी-बूटियां रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाते हैं। लहसुन की एंटी-ऑक्सीडेंटिव गुण रक्त में प्राकृतिक प्रतिरोधी कोशिकाओं के विकास से प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाते हैं। इसी तरह अदरक और सूरजमुखी के बीज लाभकारी हैं।




    गिलोय (Giloy) का काढ़ा पीएं

    गिलोय एक बहुत ही लाभकारी पौधा है। इयह अपने आप में गुणों की खान है। देश भर में यह अधिकतर क्षेत्रों में सामान्य रूप से पाई जाती है। गिलोय की एक फुट लंबी शाखा में तुलसी की 5-6 पत्तियां मिलाकर इसे 15-20 मिनट तक उबाल लें, जब तक इसमें इसके तत्व पूर तरह से न घुल जाए। इसमें स्वादानुसार काली मिर्च, सेंधा नमक या काला नमक, मिश्री मिला लें। इसे ठंडा होने दें और गुनगुने तापमान पर इसका सेवन करें। शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली बढ़ाने में यह कारगर है। यदि गिलोये का पौधा उपलब्ध नहीं हो तो हमदर्द, पतंजलि या वैद्यनाथ आदि किसी ब्रांड का गिलोय पाउडर इस्तेमाल कर यह काढ़ा बना सकते हैं।

    कपूर एक-दो बार सेवन लाभकरी

    गोली के आकार का कपूर के टुकड़ा का महीने में एक या दो बार सेवन फायदेमंद हो सकता है। बड़े लोग इसे पानी के साथ निगल सकते हैं जबकि छोटे बच्चों को यह आलू या केले के साथ मथकर दे सकते हैं। इसे सीधे मुंह में लेना मुश्किल होता है। कपूर को रोजाना नहीं लेना चाहिए इसे महीने में एक बार ही लें वरना साइड इफेक्ट हो सकते हैं।

    लहसुन बहुत फायदेमंद

    जो लोग खाने में लहसुन खाते हैं, वे रोज सुबह लहसुन की दो कलियां कच्ची चबा सकते हैं। यह गुनगुने पानी के साथ लिया जा सकता है। अन्य चीजों के बजाय लहसुन से इम्यूनिटी ज्यादा बढ़ती है। ऐसे में यह काफी फायदेमंद हो सकता है।

    दूध का सेवन भी लाभकारी

    जिन लोगों को दूध से एलर्जी नहीं है वे रोज रात को दूध में थोड़ी हल्दी डालकर ले सकते हैं। इससे भी शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होगी।

    ग्वारपाठा बढ़ाए शरीर की प्रतिरक्षा

    ग्वारपाठा ऊष्ण प्रदेशों में आसानी से उपलब्ध होने वाला पौधा है। इसकी कैक्टस जैसी पतली और लंबी पत्तियों में सुगंध रहित जेल होता है जिसका एक टी स्पून में पानी के साथ लेने से त्वचा के लिए और जोड़ों के दर्द के लिए बहुत अच्छा रहेगा। साथ ही इससे शरीर की इम्यूनिटी बढ़ेगी।

    नीम करेगा खून की सफाई

    नीम में हवा को साफ करने का गुण होता है जिससे यह वायुजनित एवं वायरल बीमारियों के लिए कारगर है। स्वाइन फ्लू भी एक वायरल बीमारी है। खून को साफ करने के लिए रोज 3-5 नीम की पत्तियां चबा सकते हैं, लाभ मिलेगा।

    रोजाना प्राणायाम करें

    गले और फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना प्राणायाम करें और जॉगिंग करें। शरीर को स्वस्थ रखने के साथ ही यह हर बीमारी के लिए फायदेमंद है जो नाक, गले और फेफड़ों को प्रभावित करती है।

    विटामिन सी युक्त फलों का करें सेवन

    विटामिन सी युक्त खट्टे फल और विटामिन सी से भरपूर आंवला जूस आदि का सेवन करें। आंवले का जूस बारह महीने नहीं मिलता, ऐसे में पतंजलि या अन्य ब्रांड के जूस का सेवन कर सकते हैं।

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