रीठा – परंपरागत डिटर्जेंट और साबुन(benefits of soapnut)

रीठा – परंपरागत डिटर्जेंट और साबुन(Benefits of Soapnut)

  • Lifestyle हिन्दी
  • no comment
  • स्वास्थ्य
  • 13033 views
  • भारत में रीठा का इस्तेमाल साबुन और डिटर्जेंट की तरह सदियों से होता रहा है। गांव-देहात में तो आज भी रीठे से कपड़े धोए जाते हैं। रीठा (Reetha – Soapnut ) के पेड़ पर गर्मियों में फूल आते हैं जो देखने में बहुत छोटे होते हैं। रीठे का फल या कहें रीठा हल्के हरे रंग का आंवले के आकार का होता है। रीठे से शैंपू, डिटर्जेंट या फिर हाथ धोने वाले साबुन तैयार किया जाता है। रीठे क ो संस्कृत में अरिष्टक, रक्तबीज, फेनिल भी कहा जाता है।

    कैसे करें रीठे का इस्तेमाल – Uses & benefits of Soapnut – Reethe ke gun aur fayde




    सोना-चांदी चमकाने में

    सोना, चांदी समेत कई अन्य धातुओं को चमकाने के लिए रीठे का इस्तेमाल किया जाता है।

    खाद्य पदार्थों की धुलाई

    खाने वाली इलायची को धोने और उसके रंग निखारने में भी रीठे (Reetha – Soapnut ) का इस्तेमाल किया जाता है। मिलावटी तेल को साफ करने में भी रीठा इस्तेमाल होता है।

    माइग्रेन दूर करने में

    एक रीठे को 1-2 कालीमिर्च के साथ घिसकर नाक में 4-5 बूंद डालने से आधे सिर का दर्द यानि माइग्रेन को ठीक होता है। रीठे की छाल को रात भर पानी में रख कर सुबह छानकर इस पानी की 1-1 बूंद नाक में डालने से भी माइग्रेन दूर होती है। माइग्रेन के अलावा रीठा (Reetha – Soapnut ) एपिलेप्सी (Epilapsy) और कोरस जैसी बिमारियों के इलाज में भी इस्तेमाल होता है।

    दंत रोग में रीठा

    दांतों की हर तरह की बीमारी दूर करने के लिए रीठे (Reetha – Soapnut ) के बीजों को तवे पर भूनकर और पीसकर पिसी हुई फिटकरी के साथ बराबर मात्रा में मिलाकर दांतों में लगाने से हर बीमारी ठीक हो जाती हैं।




    मुलायम बालों के लिए

    रीठे (Reetha – Soapnut ) के साबुन और शैंपू से बाल धोने से बाल लंबे, घने, मुलायम और चमकदार हो जाते है। यह सिर की जुंओं और रूसी को भी खत्म करता है। 100 ग्राम कपूर कचरी, 100 ग्राम नागर मोथा और 40-40 ग्राम कपूर, रीठे के फल की गिरी, 250 ग्राम शिकाकाई, 200 ग्राम आंवले का चूर्ण बनाकर लगभग 50 मिलीलीटर पानी मिलाएं। फिर इसे बालों में लगाएं। कुछ देर बाद बालों को गर्म पानी से साफ कर लें।

    मासिक धर्म में रीठा

    सूखे रीठे (Reetha – Soapnut ) का छिलका निकालकर इसके दो ग्राम चूर्ण को शहद के साथ लेने से माहवारी के रोग ठीक होते हैं।

    दमा एवं कफजनित खांसी में

    रीठे के छिलके का 5 ग्राम चूर्ण 250 मिली पानी में काढ़ा बनाकर पीने से दमा और कफजनित खांसी दूर होती है। उल्टी होने पर ज्यादा गर्म पानी पिलाएं जिससे उल्टी हो और सारा कफ फेफड़े से निकल जाए। इससे श्वास, खांसी, कफ के रोग से मुक्ति मिलेगी।

    वीर्य वृद्धि

    रीठे की गिरी का चूर्ण बनाकर इसमें बराबर मात्रा में गुड़ मिलाएं। इसका एक चम्मच सुबह-शाम एक कप दूध के साथ सेवन करने से वीर्य बढ़ता है।

    गले के रोग

    10 ग्राम रीठे (Reetha – Soapnut ) के छिलके को पीसकर एक ग्राम का चौथा भाग सुबह-शाम पान या शहद में मिलाकर रोजाना लेने से गले के दर्द ठीक हो जाता है।




    बिच्छू का विष

    बिच्छू का जहर खत्म करने के लिए रीठे की गिरी को पीसकर उसमें बराबर मात्रा में गुड़ मिलाकर 1-2 ग्राम की गोलियां बनाकर 5-5 मिनट के बाद पानी के साथ लेने से 15 मिनट में तीन गोलियां लेने से आराम मिलेगा।

    दस्त और बवासीर

    आधा लीटर पानी में रीठे (Reetha – Soapnut ) को पकाकर ठंडा कर फिर उस पानी को आधे कप की मात्रा में रोजाना सुबह-शाम पीने से दस्त रुक जाता है।

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *