रानी पदमिनी या पदमावती का इतिहास, फिल्म विवाद और अन्य जानकारी – history of rani padmavati
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रानी पदमिनी या पदमावती का इतिहास, फिल्म विवाद और अन्य जानकारी – History of Rani Padmavati

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  • भारतीय इतिहास के पन्नों में अत्यंत सुंदर और साहसी रानी पद्मावती (Rani Padmavati) का जिक्र मिलता है। रानी पद्मावती को रानी पद्मिनी (Padmini) के नाम से भी जाना जाता है। रानी पद्मावती के पिता सिंघल प्रांत यानी श्रीलंका के राजा थे जिनका नाम गंधर्वसेन था। उनकी माता का नाम चंपावती था। पद्मावती बाल्य काल से ही दिखने में अत्यंत सुंदर और आकर्षक थीं। उनके माता-पिता ने उन्हे बड़े लाड-प्यार से बड़ा किया था। ऐसा भी कहा जाता है कि पद्मावती के पास एक बोलता तोता था जिसका नाम हीरामणि (Hiramani) था।

    रानी पद्मावती का इतिहास और हिंदी फिल्म – Rani Padmavati ka Itihas Aur Hindi Film




    इतिहास में खिलजी वंश के शासक अलाउद्दीन खिलज़ी के 1303 में चित्तौडग़ढ़ के किले पर आक्रमण कर उसे अपने कब्ज़े में लेने का जिक्र है। 1302 में रतन सिंह रावल ने गद्दी संभाली थी। मानते हैं कि रतन सिंह की पत्नी की खूबसूरती के चर्चे दूर-दूर तक फैले थे। एक दिन अलाउद्दीन खिलजी को भी इसका पता चल गया। अलाउद्दीन चित्तौडग़ढ़ (Chittorgarh) चला गया और कहा जाता है कि अलाउद्दीन रानी पद्मिनी (Rani Padmini) को पाने के लिए पागल हो उठा बहुत से लोग इस कहानी पर यकीन करते हैं, लेकिन बहुत से लोग इसे झूठ मानते हैं। खिलज़ी का स्रोत अमीर ख़ुसरो का खज़ाइनउल फुतूह है, जिसमें इसे बस एक सैनिक अभियान की तरह दर्ज है। नया राजा गद्दी पर बैठा तो उसे काबू में करने के लिए अभियान चलाया गया था।

    यद्यपि बहुत से इतिहास जानकारों के अनुसार इस अंतराल के दौरान चित्तोड़ राजपूत राजा रतन सिंह के शासन में था जिन्हे एक बहादुर शासक और राजा के रूप में जाना जाता है! खिलजी किसी भी कीमत पर रानी पद्मिनी को पाना चाहता था और कहा जाता है के जब खिलजी अपनी सेना लेकर चितौड़ पर जब आक्रमण किया था तो उसने राजा को बंदी बना लिया था! इसके बाद जनरल गोरा और बादल ने पद्मावती के साथ मिलकर १ योजना बनाई! उन्होंने खिलजी को बुलावा भेजा के वो सुबह पद्मावती को लेकर आने को तैयार है! लेकिन अगले दिन चितौड़ से रानी के साथ काम करने वाली महिलाओं को उन पालकियों में भेजा गया और मौका देखकर पद्मिनी रतन सिंह को छुड़ा कर ले गई!




    इस बात से खिलजी बहुत क्रोधित हुआ और कुछ समय बाद दुबारा चितौड़ पर आक्रमण किया! इस बार खिलजी ने किले को चारो तरफ से घेर लिया और रतन सिंह की सेना ने डटकर मुक़ाबला करने का निर्णय लिया! परन्तु कुछ समय बाद किले के द्वार खोलने पड़े और खिलजी की बहुत बड़ी सेना से आमना सामना होना था! यह देखकर रानी पद्मावती को हार का भय हुआ और लगा के उसे हर के बाद खिलजी के साथ जाना पड़ेगा! इसलिए उन्होंने निश्चय किया के वो जौहर कर लेंगी! इसके अनुसार दुश्मन के साथ जाने के बजाय उन्होंने एक बहुत बड़े अग्निकुंड में कूदकर अपनी प्राण देने का प्रण कर लिया था! सबसे पहले रानी ने अग्निकुंड में कूद कर प्राण दिए थे और बाद में अन्य राजपूत महिलाओं ने भी कूदकर प्राणो का त्याग किया! यद्पि खिलजी की जीत होती है परन्तु किले में उसे सिर्फ अस्थियां ही मिलती है! यही कारन है के रानी पद्मावती के सम्बन्ध में जोहर का उल्लेख और सारा राजपूत समाज ही नहीं अन्य भी उन्हें सम्मान से याद करता है !

    पद्मावत (Padmavat) नाम की कविता

    इस घटना के 237 साल बाद मलिक मोहम्मद जायसी ने पद्मावत नाम की एक कविता लिखी। इसमें पहली बार अलाउद्दीन का पद्मिनी को देखकर उस पर दिल आने की बात लिखी गई है। जायसी ने पद्मिनी को एक चौहान राजपूत हमीर शंक चौहान जो श्रीलंका का राजा है, की बेटी बताया।

    संजय लीला भंसाली की फिल्म से शुरू हुआ विवाद – Sanjay Leela Bhansali

    बॉलिवुड निर्देशक-निर्माता संजय लीला भंसाली की दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone), रणवीर सिंह (Ranveer Singh) और शाहिद कपूर (Shahid Kapoor) स्टारर फिल्म पद्मावती जैसे-जैसे रिलीज के करीब आ रही है्, फिल्म को लेकर विवाद तेजी से हो रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इसका विरोध हो रहा है। लोग जगह-जगह फिल्म के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और फिल्म को रिलीज न होने देने की धमकी दे रहे हैं। वहीं निर्देशक संजय लीला भंसाली ने आनन-फानन में एक विडियो मेसेज जारी कर फिल्म से जुड़े विवाद को अफवाह बताया है।

    कोई ड्रीम सिक्वैंस नहीं: भंसाली

    बकौल संजय लीला भंसाली, फिल्म पद्मावती बेहद ईमानदारी, मेहनत और जिम्मेदारीपूर्ण तरीके से बनाई है। उन्होंने कहा कि वह रानी पद्मावती की कहानी से हमेशा बेहद प्रभावित रहे हैं। यह फिल्म उनकी वीरता और बलिदान को नमन करती है। कुछ अफवाहों की वजह से फिल्म को विवाद का मुद्दा बनाया जा रहा है। अफवाह यह है कि फिल्म में रानी पद्मावती और अलाउदीन खिलजी के बीच कोई ड्रीम सीक्वंस दर्शाया गया है। उन्होंने इस बात से साफ तौर पर इस बात से इंकार किया है और इस बारे में लिखित प्रमाण भी दिया है।

    सत्ती प्रथा को प्रोत्साहन देने का आरोप

    संजय लीला भंसाली की फिल्म को लेकर कई समुदायों के विरोध के अलावा कई अन्य विवाद भी शुरू हो गए हैं। रानी पद्मिनी और अलाउद्दीन खिलजी (Alauddin Khilji) के बीच किसी तरह के भी ड्रीम सीक्वेंस दिखाने की अफवाह के बाद यह फिल्म एक और कानूनी पचड़े में फंस गई है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में एक जनहित याचिका दायर कर ‘पद्मावती’ फिल्म पर सती प्रथा को महिमा मंडित करने और इस तरह इसे बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया। यह बताना भी जरूरी हो गया कि फिल्म राजस्थान की राजपूती रानी पद्मिनी के बारे में है। कहानी है कि इस राजपूत रानी ने अलाउद्दीन खिलजी और उसकी सेना के आक्रमण के दौरान अपनी अस्मत बचाने के लिए जौहर कर लिया था। इस फिल्म में रानी पद्मिनी का किरदार दीपिका पादुकोण निभा रही हैं।

    पद्मावती फिल्म रिव्यु – समीक्षा – Rani Padmavati Film Review

    शुक्रवार 17 नवंबर को संजय लीला बंसाली ने यह फिल्म बहुत से लोगो को दिखाई जिनमे काफी मीडिया से जुड़े लोग शामिल थे. कहा जा रहा है के इस फिल्म में राजपूत समाज के शौर्य का खूब वर्णन किया गया है! राजा रतन सिंह की बहादुरी, दयालुता का बखान है और साथ रानी पद्मिनी की खूबसूरती और शौर्य का भी वर्णन है! अलाउदीन खिलजी जैसे क्रूर शासक के बारे में भी वही दिखाया गया है जिसका इतिहास गवाह रहा है! काफी लोगों का कहना है के फिल्म को देखकर राजपूत समाज को और भारत संस्कृति के प्रेमी हर व्यक्ति को गर्व महसूस होगा!

    लेकिन कुछ लोगो का मानना यह भी है के सम्पादको या मीडिया जगत के लोगों को फिल्म दिखाने के बजाय विरोध में जुड़े कुछ प्रमुख व्यक्तियों को अपने पक्ष में ले या बैठकर इसे सुलझाएं जिससे की फिल्म से जुड़ा विवाद जल्दी समाप्त हो! अभिवयक्ति की आजादी के नाम पे भारतीय इतिहास के तथ्यों से तोड़ मरोड़ करना भी उचित नहीं, ऐसे में जब बहुत से लोगों की भावनाएं इससे जुडी हो! साथ ही बिना फिल्म के तथ्यों को जाने इसका विरोध भी उतना ही अनुचित है!

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