सीखें ना कहने की कला – learn to say no

सीखें ना कहने की कला – Learn To Say No

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  • ना (Na – No) एक ऐसा शब्द जो सुनने में जितना बुरा लगता है, उतना ही कहने वाले को भी लगता है। लेकिन ज़िंदगी में ना का भी अपनी बहुत बड़ा महत्व है “जिसे ना कहने की कला नहीं आती उसके हाँ में भी कहाँ दम है”

    ‘ना’ कहने की कला सीखें – Na Kahna Seekhen – Learn To Say No




    ना कहना क्यों जरूरी:

    कभी कभी आप दूसरों की भावना को ठेस नहीं पहुँचाना चाहते ऐसे में आप उन चीजों के लिए भी हाँ कह देते हैं, जिसके कारण आपकी ज़िंदगी खुद उलझने वाली हैं। और जिसके बाद आप व्यर्थ के तनाव और भागदौड़ से गुजरते हैं। इसलिए कभी भी किसी को हाँ कहने से पहले उसके हर पहलुओं पर सोचें। रिश्ते, लोग और उनकी भावनाएं अपनी जगह पर हैं और आपकी अपने लिए प्रतिबद्धता अपने जगह पर है। इसलिए हर बात पर हाँ मुश्किल का कारण बन सकता है।

    आप सुपर ह्यूमन (Super Human) नहीं हैं:

    आपको अपनी क़ाबलियत, सीमाओं, और क्षमताओं के विषय में पता है इसलिए उनके हिसाब से ही फैसले लें, यानी हाँ या ना करें। दिनभर में औरों की तरह आपके पास भी 24 घंटे (hours) ही होते हैं इस बात का ध्यान रखें और इन 24 घंटे में ही आपको अपनी प्राथमिकताएं तय करें।

    सबसे पहले हैं आप:

    अगर आप अपनी केयर (Care) नहीं करेंगे तो यकीनन कोई और भी नहीं करेगा। अगर आप खुद की प्राथमिकता नहीं हैं तो यकीन मानिये आप दूसरों की प्राथमिकता भी नहीं बन सकतें हैं। इसलिए पहले अपने काम को अच्छे तरह से करिये इसके बाद जो समय बच जाए उसमें दूसरों के बारें में सोचें।

    ना कहने का सेहत पर अच्छा असर पड़ता है:

    आँखें बड़ी करने की जरूरत नहीं है। जब आप गैर जरूरी काम को ना कहना, या यूँ कहें कि खुद को प्राथमिकता देना शुरू करते हैं तो आपके पास खुद के लिए पर्याप्त टाइम होता है। सोने का और खुद पर ध्यान देने का, ऐसे में खुद-ब-खुद आपकी सेहत बेहतर हो जाती है।




    बढ़ता है आपका सम्मान:

    हमेशा हाँ कहने वालों को मूर्ख का दर्जा दिया जाता है। जिसे सही और गलत में फर्क नहीं पता हैं जब आप ना कहतें हैं तो सामने वाले को यह एहसास हो जाता है कि आप सही और गलत का फर्क समझते हैं।

    पड़ती है गलत छवि:

    जब आप सिर्फ दूसरों का मन रखने के लिए कोई काम अपने हाथ में लेते है तो आप उसे परफेक्ट (Perfect) तरीके से नहीं कर पातें हैं। ऐसे में उस काम को वह रिजल्ट नहीं मिल पाता जैसा आपने जिसको हाँ किया था उसने सोचा था। ऐसे में आपकी छवि धूमिल होती है।




    बने समझदार व्यक्ति:

    आपके हाँ और ना पर आपके व्यक्तित्व की पूरी किताब लिखी जा सकती है। इसलिए किसी को जुबान देने से पहले एक बार सोचे जरूर, हाँ बोल के जब आप मुकरते हैं तो आपकी रेस्पेक्ट (Respect) और विश्वसनीयता दोनों कम होती है, जो आपके प्रोफेशनल (Professional) और पर्सनल (Personal) लाइफ दोनों के लिए ही सही नहीं है।

    ऊपर बताई गयी बातों का अगर आप ध्यान रखेंगे मुश्किलें तो यकीनन आपकी ज़िंदगी से मुश्किलें आपने आप कम हो जाएंगी और आप एक समझदार व्यक्ति के रूप में लोगों के नजरों में स्थापित हो जाएंगे।

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