मंगल ग्रह ज्योतिष में – mangal graha in jyotish (mars planet)

मंगल ग्रह ज्योतिष में – Mangal Graha in Jyotish (Mars Planet)

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  • वैदिक ज्योतिष में मंगल ग्रह (Mars Planet) का अपना विशेष महत्व है । देव ग्रहों कि श्रेणी में आने वाले मंगल देवताओं के सेनापति हैं व स्वभाव से क्रूर मॉने जाते हैं। मंगल की प्रधानता वाले जातक निडर व साहसी होते हैं । इनमे तीव्रता से निर्णय लेने की क्षमता देखि जा सकती है । कभी कभार तीव्र निर्णय के कारन अथवा जल्दबाजी में लिए गए निर्णय के परिणामस्वरूप जातक को परेशानियों का करना पड़ता है । मेष तथा वृश्चिक राशि के स्वामि मंगल देवता कर्क राशि में नीच और मकर में उच्च के होते है। मंगल चौथी, सातवीं और आठवीं दृष्टि से देखते हैं । मंगल को कर्क व धनु लग्न की कुंडली का इष्ट देवता माना जाता है । युद्ध के देवता मंगल अंगारक या भौम नाम से भी जाना जाते हैं। जन्म कुंडली में स्वराशिस्थ या मकर राशि में स्थित मंगल (Mangal ) रुचक नामक पंच महापुरुष योग का निर्माण करते हैं। साधारणत जन्मकुंडली के एक, चार, सात, आठ व बारहवें भाव मे यदि मंगल (Mangal) स्थित हों तो ऐसी कुंडली को माँगलिक मान लिया जाता है। माँगलिक कुंडली से सम्बंधित कोई भी उपाय अपनाने से पूर्व किसी योग्य विद्वान् से परामर्श अवश्य लेना चाहिए ।

    मनगल ग्रह (Mangal Grah) की कुछ विशेष जानकारी – Mars Planet Hindi




    रंग – लाल

    अंक – 9

    दिन – मंगलवार

    दिशा – दक्षिण

    राशि स्वामी – मेष (Aries) , वृश्चिक (Scorpio)

    नक्षत्रे स्वामी – मृगशिरा , चित्रा , धनिष्ठा

    रत्न – मूँगा (Moonga)

    धातु – ताम्बा , पीतल , सोना

    देव – पवनपुत्र हनुमान , भगवान शिव

    उच्च राशि – मकर (Capricorn)

    नीच राशि – कर्क (Cancer)

    मूल त्रिकोण – मेष (Aries)

    महादशा समय – 7 वर्ष

    मंगल का बीज मंत्र – ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नमः

    कारक – Managal ke Karak

    मंगल निर्णय क्षमता, वीरता, भूमि, अचल संपत्ति, छोटे भाई बहन, पुलिस, सेना, अस्त्र शस्त्र, दुर्घटना, उच्च रक्तचाप, आपरेशन, गर्भपात आदि का कारक गिना जाता है।

    मंगल ग्रह के अशुभ फल या लक्षण : Mangal Grah Shubh Fal – Mars Planet Hindi

    • क़र्ज़ा बह जाना
    • रक्त सम्बन्धी विकार हो जाना
    • मकान के निर्माण में देरी होना
    • विवाह में विलम्ब होना
    • भूमि से जुड़े कार्यों में हानि हो जाना
    • बड़े भाई से विवाद , परेशनियाँ मिलना



    मंगल ग्रह के शुभ फल या लक्षण :

    • जातक गुरुजनों व बड़े- बुज़ुर्गों का सम्मान करने वाला होता है
    • ससुराल पक्ष से आदर – सम्मान मिलता है
    • भाई – बहनों से मधुर सम्बन्ध रहना
    • जातक ऊर्जावान होता है
    • जात

    मंगल ग्रह के उपाय- Mangal grah ke Upay




    यदि जन्म कुंडली में मंगल कमज़ोर हो तो किसी विद्वान की सलाह से मूँगा धारण करके इसके बलाबल में बढ़ोतरी की जा सकती है। मूँगा चढ़ते पक्ष के मंगलवार को रिंग फ़िंगर में धारण किया जाता है। इसे ताम्बा, पीतल या सोने में से किसी धातु कि अँगूठी में पहना जाता है। यदि आपकी कुंडली में मंगल अशुभ स्थिति में हो तो स्वयं पूजा पाठ करके, मंगलवार का व्रत रखकर, मूँग- मसूर की दाल, स्वर्ण, गुड़, घी आदि दान करके व बंदरों को गुड़ चना खिलाकर तथा छोटे भाई बहनो से सम्बन्ध सुधारकर मंगल के बुरे प्रभाव से बचा जा सकता है। अनुसंधान से प्राप्त अनुभव के आधार पर हनुमान चालीसा का नित नियम के साथ किया गया पाठ मंगल के दुश्प्र्भाव से रक्षा करने का रामबांन उपाय है।

    मंगल मन्त्र- Mangal grah Mantra

    ॐ अंगारकाय विदमहे शक्ति हस्ताय धीमहि तन्नो भौमः प्रचोदयात
    ॐ अं अंगरकाय नमः
    ॐ भौम भौमाय नमः

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