जिमीकंद के आयुर्वेदिक और औषधीय गुण(benefits of yum)

जिमीकंद के आयुर्वेदिक और औषधीय गुण(Benefits of Yum)

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  • जिमीकंद भारतीय रसोईघरों में सर्दियों के मौसम में पकाई जाने वाली एक आम सी सब्जी है। जिमीकंद जमीन के नीचे उगने वाली सिर्फ एक सब्जी ही नहीं बल्कि एक जड़ी-बूटी भी है। यह मानव शरीर को स्वस्थ और निरोगी रखने में मदद करती है। जिमीकंद में काफी मात्रा में ऊर्जा है। इसीलिए इसे सर्दियों के मौसम में ज्यादातर पकाया जाता है। इसमें काफी मात्रा में फाइबर, विटामिन सी, विटामिन बी, फोलिक एसिड और नियासिन होता है। वहीं पोटाशियम, आयरन, मैगनीशियम, कैल्शियम और फासफोरस जैसे मिनरल पाए जाते हैं। इसके पत्ते 2-3 फुट लंबे, गहरे हरे रंग के और हल्के हरे धब्बे वाले होते हैं। इसकी पत्तियां छोटी-छोटी लंबोतरी गोल पत्तियों से गुच्छों में घिरी होती हैं। कई संप्रदायों में प्याज-लहसुन के साथ-साथ जिमिकंद से दूर रहने की सलाह दी जाती है। ऊर्जा से भरपूर होने के कारण कारण इसे कामुकता बढ़ाने वाला माना गया है।

    गुणों के खजाने जिमीकंद को संस्कृत में सूरण, हिंदी में सूरन, जिमिकंद, जिमीकंद और मराठी में गोडा सूरण, बांग्ला में ओल, कन्नड़ में सुवर्ण गडड़े, तेलगु में कंडा डूंपा और फारसी में जमीकंद कहते हैं। हाथी के पंजे की आकृति के समान होने से इसे अंग्रेजी में एलीफेंट याम या एलीफेंट फुट याम कहते हैं।




    यह विटामिन बी-6 का अच्छा स्रोत है और रक्तचाप को नियंत्रित कर हृदय को स्वस्थ रखता है। इसमें विटामिन ए और बी भी होते हैं। इसमें ओमेगा-3 काफी मात्रा में पाया जाता है। यह खून के थक्के जमने से रोकता है। इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट, विटामिन सी और बीटा कैरोटीन होते हैं जो कैंसर पैदा करने वाले फ्री रेडिकल्स से लडऩे में सहायक है। इसमें पोटैशियम होता है जो पाचन में सहायक है। इसमें तांबा है जो लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाकर शरीर में रक्त बहाव को दुरुस्त करता है।

    एहतियात भी जरूरी

    आयुर्वेद में किसी भी प्रकार के चर्म या कुष्ठ रोग से ग्रस्त लोगों को इसे नहीं खाना चाहिए। जिमीकंद अग्निदीपक, रुखा, कसैला, खुजली करने वाला, रुचिकारक विष्टम्मी, चरपरा, कफ और बवासीर रोगनाशक है। इसमें ओमेगा-3 और भरपूर मात्रा में तांबा होने से इसे आप कभी-कभार खा सकते हैं।

    जिमीकंद के फायदे

      • जिमीकंद दिमाग तेज करने में मददगार है। अकसर बहुत सी चीजें हम भूल जाते हैं लेकिन जिमीकंद खाने से याद्दाश्त बढ़ती है और दिमाग तेज बनता है। यह अल्जाइमर रोग होने से बचाता है।
      • सांस और त्वचा की समस्या दूर कर इसे फोड़े-फुंसी या अन्य चर्म रोग पर लगाने से तो लाभ मिलता है ही, साथ ही यह कफ और सांस की समस्या को भी दूर करता है। विटामिन बी 6 का अच्छा स्रोत है। यह शरीर में अच्छी मात्रा में बी 6 होने से दिल की बीमारी नहीं होती।
      • इसमें एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन सी और बीटा कैरोटीन होता है जो कैंसर पैदा करने वाले फ्री रैडिकल्स से लडऩे में सहायक है। यह आहार गठिया और अस्थमा रोगियों के लिए बहुत अच्छा है।
      • पाचन क्रिया दुरुस्त‍ रखने के लिए इसे नियमित खाने से कब्ज और खराब कोलेस्ट्रॉल की समस्या दूर होती है। इसमें अच्छी मात्रा में पोटैशियम होता है जो पाचन को ठीक करता है। इसे नियमित खाने से कब्ज और खराब कोलेस्ट्रॉल की समस्या दूर हो जाती है।



    • जिमीकंद में मौजूद कॉपर लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाकर शरीर में खून के फ्लो को दुरुस्ता करता है। वहीं आयरन ब्लड सर्कुलेशन को ठीक करने में मदद करता है।
    • जिमीकंद में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण यह आहार गठिया और अस्थमा रोगियों के लिए सबसे अच्छा है।
    • शरीर में अच्छी मात्रा में बी 6 होने से दिल की बीमारी नहीं होती। यह ब्लड प्रेशर और हार्ट फेल के लिए भी जिम्मेदार है। जि‍मीकंद में भरपूर विटामिन बी होता है। रक्तचाप को नियंत्रित कर हृदय को स्वस्थ रखता है।
    • जिमीकंद का अधिकतर उपयोग बवासीर, सांस रोग, खांसी, आमवात और कृमिरोगों में किया जाता है। जिमीकंद के प्रमुख गुणों में से एक इसका उपयोग बवासीर में होना है। इसी वजह से इसे अर्शीघ्न भी कहते हैं।
    • जिन लोगों को लीवर या यकृत में समस्या हो, उनके लिए भी जिमीकंद एक वरदान है। इसके सेवन से वातरोग में भी फायदा मिलता है।
    • वजन कम करने में सहायक है। फाइबर से भरपूर होने से जिमीकंद के सेवन से वजन कम होता है। यदि वजन कम करना चाहते हो तो जिमीकंद को आहार में शामिल करें।

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