आक के औषधीय और आयुर्वेदिक गुण (Benefits of Aak Tree)

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  • आक का वृक्ष (Aak Plant) पूरे भारत वर्ष में पाया जाता है। इसकी ऊंचाई 8-10 फीट तक होती है जो गर्म और शुष्क जंबर जमीन पर उगता है। इसके पत्ते हरे और मोटे आयताकार होते हैं जो करीब चार इंच लंबे और दो इंच चौड़े होते हैं। इसके फूल सफेद गंधहीन, फल 2-3 इंच लंबे और मुड़े हुए और बीज महीन रेशम के समान गुच्छेदार रूई युक्त छोटे और चपटे होते हैं। इसकी डालियों और पत्तों को तोडऩे पर दूध निकलता है जिसका आखों में पडऩा घातक है।

    आक वृक्ष दो प्रकार का होता है: श्वेतार्क और रक्तार्क




    रक्तार्क वक्ष कम ऊंचे और पत्ते श्वेतार्क पत्तों से छोटे होते हैं। इसके फूलों में हल्की खुशबू होती है। ये रक्त विकार, कुष्ठ, उपदंश के लिए प्रयोग किया जाता है। इसकी छाल का प्रयोग नीम के तेल के साथ कई चर्म रोगों में होता है।

    श्वेतार्क पेड़ ज्यादा ऊंचा होता है जिसके पत्ते रक्तार्क से ज्यादा कोमल और हरे होते हैं। इसके फूल सफेद, बड़े और सुंदर होते हैं। इसे गणेश जी का रूप माना जाता है। मान्यता है कि इसकी जड़ में गणेश जी का वास है। उसी को श्वेतार्क गणपति भी कहते हैं।

    आक(Aak) एक जहरीला पौधा है। हिंदू संस्कृ ति में इससे शिवजी पर चढ़ाना शुभ है। इसे आक ,आकडा, मदार आदि कई नामों से जानते हैं। यह जहरीला है, इसलिए इसे वैद्य की देखरेख में ही लेना चाहिए।

    आसान प्रयोग – Aak ke asan Gharelu Upay

      • अगर किसी को चलती गाड़ी में उलटी आती हो, उसे जिस तरफ की श्वास ज्यादा चल रही हो, उस पैर के नीचे इसके पत्ते रखने चाहिए। इससे यात्रा में कोई तकलीफ नहीं होगी।
      • आक के पीले पड़े पत्तों को घी में गर्म कर उसका रस कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।
      • दूध कभी भी सीधे आंखों पर नहीं लगाना चाहिए। अगर दाई आंख दुख रही हो तो बाएं पैर के नाख़ून और बाई आंख दुख रही हो तो दाएं पैर के नाखूनों को आक के दूध से तर कर दें।
      • रुई को आक के दूध और थोड़े से घी में भिगोकर दांत में रखने से दांतों का दर्द ठीक हो जाता है।
      • हिलते हुए दांत पर आक का दूध लगाकर आसानी से निकाला जा सकता है।
      • आक की कोंपल सुबह खाली पेट पान के पत्ते में रख चबा कर खाने से 3-5 दिन में पीलिया ठीक हो जाता है।
      • सफेद आक(Aak) की छाया में सुखी जड़ को पीस कर 1-2 ग्राम की मात्रा गाय के दूध के साथ लेने से बांझपन ठीक होता है। बंद ट्यूब और नाडिय़ां खुल जाती हैं और मासिक धर्म और गर्भाशय की गांठों में लाभ होता है।
      • आक(Aak) का दूध लगाने से पैरों के छाले ठीक हो जाते हैं।



      • आक की रुई को कपड़ों में भर रजाई-तकिये में इस्तेमाल करने से वात रोगों में लाभ मिलता है।
      • कोई घाव अगर भर न रहा हो तो आक की रुई उसमे भर दें और रोज बदल दें। लाभ मिलेगा।
      • आक के दूध में सामान मात्रा में शहद मिला कर लगाने से दाद में लाभ होता है। इसी तरह आक की जड़ के चूर्ण को दही में मिलाकर लगाना भी दाद में लाभकारी होता है।
      • आक के फूल तोडऩे पर जो दूध निकलता है, उसे नारियल तेल में मिलाकर लगाने से खाज दूर होती है।

    आक के अन्य घरेलु उपाय – Aak tree use, benefits at home

    • इसके पत्तों को सुखाकर उसका पाउडर जख्मों पर बुरकने से दूषित मांस दूर हो स्वस्थ मांस पैदा होता है।
    • आक(Aak) की मिट्टी की टिकिया कीड़े पड़े जख्मों पर बांधने से कीड़े टिकिया पर आ कर मर जाते हैं और जख्म ठीक हो जाता है।
    • पेट में दर्द में आक के पत्तों पर घी लगा कर गर्म कर सेकने से लाभ मिलता है।
    • आक की लकड़ी का छह ग्राम कोयला मिश्री के साथ लेने से शारीर में जमा पारा भी पेशाब के रास्ते निकल जाता है।
    • कड़वे तेल में इसके पत्तों को पकाकर लगाने से घाव ठीक हो जाता है।
    • दमा रोग में आक के पत्ते पर कत्था-चूना लगाकर पान की तरह खाना चाहिए।
    • सूजन दूर करने के लिए आक का हरा पत्ता पीसकर लेप लगाना लाभकारी है।
    • आक का दूध निकालकर उसका फाहा मुंह पर लगाने से लकवा दूर होता है।
    • चोट, मोच के दर्द में आक के दूध में नमक मिला कर लेप करने से दर्द कम होता है।
    • किसी भी कारण से अगर बच्चों का पेट फूल गया है तो आक के पत्तों पर अरंड का तेल लगा कर और इनको सेक कर पेट पर पट्टी के रूप में बांधने से बच्चे को एक दस्त आएगा और पेट ठीक हो जाएगा।
    • आक(Aak) के पांच कोमल पत्तों पर नमक और तेल लगा कर आग में जला दें। इन की राख को निकल कर रख लें और रोजाना 2 चुटकी खाने से 15 दिन के बाद बवासीर ठीक हो जाता है।
    • बिच्छू के काटने वाली जगह पर आक का दूध लगाने से दाह और दर्द दोनों ठीक हो जाते हैं।

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