हल्के में न लें गैस की समस्या, तुरंत अपनाएं ये घेलू उपचार (home remedies for acidity)

हल्के में न लें गैस की समस्या, तुरंत अपनाएं ये घेलू उपचार (Home Remedies for Acidity)

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  • शरीर में अम्ल (एसिड) की मात्रा बढऩे से पेट में गैस, बदहजमी, खट्टे ढकार आम सी बात है। हालांकि इसे हल्के में न लेकर तुरंत घरेलू या डॉक्टरी उपचार करने चाहिएं। एसिडिटी(Acidity) या बदहजमी से शायद ही कोई अंजान हो। अगर आपको घरेलू उपचार मालूम हैं तो तुरंत अपनाने चाहिए। इस पर भी अगर आपको बार-बार एसिडिटी की समस्या हो तो फौरन डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। हालांकि इसके उपचार करने से पहले मूलभूत कारण जानने से उसकी रोकथाम में लाभ मिलेगा।

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    आजकल की भागदौड़ भरी और अनियमित जीवन शैली से पेट की समस्या आम हो गई है। एसिडिटी को चिकित्सकीय भाषा में गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफलेक्स डिजीज कहते हैं। वहीं आयुर्वेद में इसे अम्ल पित्त कहते हैं। आजेकल इससे हर दूसरा व्यक्ति या महिला पीडि़त हैं। एसिडिटी होने पर शरीर की पाचन प्रक्रिया ठीक नहीं रहती। एसिडिटी का प्रमुख लक्षण रोगी के सीने या छाती में जलन। कई बार एसिडिटी से सीने में दर्द, मुंह में खट्टा पानी आना है। जब यह तकलीफ बार-बार हो तो समस्या गंभीर हो सकती है। एसिडिटी(Acidity) से कई बार ऐसा महसूस होता है जैसे भोजन गले में अटका है या कई बार डकार के साथ खाना मुंह में आ जाता है। रात में सोते समय यह शिकायत ज्यादा होती है। कई बार एसिड भोजन नली से सांस की नली में पहुंच जाता है जिससे दमा या खांसी भी हो सकती है। कभी-कभी मुंह में खट्टे पानी के साथ खून भी आ सकता है। एसिडिटी(Acidity) का अर्थ है जब पेट में एसिड का अधिक स्राव होने लगे। जब यह स्राव तेज हो जाए तो ऐसा महसूस होता है जैसे सीना जल रहा है। ऐसा ज्यादातर तभी होता है जब तेज मिर्च मसाले वाला भोजन खाते हैं।

    गैस या एसिडिटी से बचने के घरेलू उपाय

      • एसिडिटी(Acidity) होने पर चाय-कॉफी का सेवन कम करना चाहिए। ग्रीन टी का सेवन फायदेमंद रहता है।
      • ज्यादा से ज्यादा हरी सब्जियां, खासकर जिनमें विटामिन बी और ई हो, का सेवन करना चाहिए। जैसे सहजन, बीन्स, कद्दू, पत्ता गोभी, प्याज और गाजर।
      • खाना खाने के बाद तरल पेय का सेवन न करें। आधे घंटे के बाद गुनगुना नींबू पानी परना लाभकारी है।
      • खाने में केला, खीरा, ककड़ी, तरबूज, नारियल पानी, धनिया, पुदीने की चटनी और बादाम की शिकंजी का सेवन एसिड लेवल घटाने में मददगार है।
      • सौंफ और चंदन का शर्बत बना कर पीने से पेट की जलन को शांत किया जा सकता है।
      • नींबू और शहद में अदरक का रस मिलाकर पीने से गैस के कारण पेट में होने वाली जलन शांत होती है।
      • एंजाइम्स से भरपूर होने के कारण गैस होने पर में अनानास का जूस विशेष लाभकारी है। खाने के बाद अगर पेट अधिक भरा और भारी महसूस हो तो आधा गिलास ताजा जूस पीएं, लाभ मिलेगा।
      • अगर एसिडिटी से परेशान हैं तो ज्यादा स्मोकिंग और ज्यादा शराब पीने से बचना चाहिए। चिविंग गम, कच्ची सौंफ या लौंग चबाना बेहतर विकल्प है।
      • दही या छाछ में भुना हुआ पिसा जीरा डाल कर सेवन करने से भी लाभ मिलता है।
      • मूली का नियमित सेवन एसिडिटी से निजात दिलाने में लाभकारी होता है।



    • सुबह-सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीने से एसिडिटी(Acidity) में फायदा होता है। पानी में पुदीने की कुछ पत्तियां डालकर उबालकर रोज खाने के बाद पीने से लाभ मिलेगा।
    • अदरक और परवल को मिलाकर काढ़ा बना लीजिए। इस काढ़े को सुबह-शाम पीने से एसिडिटी की समस्या नहीं रहेगी।
    • दूध में मुनक्का डालकर उबालें। उसके बाद दूध को ठंडा करके पीने से फायदा होगा।
    • एसिडिटी होने पर मुलेठी का चूर्ण या काढ़ा बनाकर उसका सेवन से भी फायदा होता है।
    • त्रिफला चूर्ण को दूध के साथ पीने से एसिडिटी दूर होती है। पेट की जलन शांत होती है।
    • डेढ़ लीटर पानी में दो चम्मच शाह जीरा डालें । 10-15 मिनिट उबालें। यह काढ़ा मामूली गर्म हालत में दिन में तीन बार पीएं।
    • एसिडीटी निवारण के लिए आंवला बेहतरीन है।
    • तुलसी के दो-चार पत्ते दिन मेंचबाकर खाने से अम्लता में लाभ मिलता है। इसका रस निकाल कर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में सेवन किया जा सकता है।
    • खाना खाने के बाद गुड़ जरूर खाएं। इसे मुंह में रखें और चबा-चबा कर खाएं।
    • एक कप पानी उबालकर उसमें एक चम्मच सौंफ मिलाइए। इसे रात भर के लिए ढंक कर रखें और सुबह उठ कर पानी छान लीजिए। इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर तीन भोजन के बाद इसे लीजिए।
    • गैस से फौरन राहत के लिए दो चम्मच आंवला जूस या सूखा आंवला पाउडर और दो चम्मच पिसी मिश्री लें और दोनों को पानी में मिलाकर पीएं।
    • 25 ग्राम धनिये को रात में पत्थर के बर्तन में भिगोकर सुबह छान लें। इसमें थोड़ी सा सुहागे की बुकनी मिलाकर कुछ दिन नियमित सेवन करें, लाभ मिलेगा।

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